गेजिंग (मधु शर्मा)। सोरेंग जिला अंतर्गत स्थित गेलिंग धाम में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय जोसमनी संत साहित्य सम्मेलन का आज बुधवार को समापन हो गया। गुरु ज्ञानदिल दास धाम समिति तथा अखिल भारतीय जोसमनी सनातन धर्म कल्याण संगठन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह सम्मेलन गुरु ज्ञानदिल दास धाम (गेलिंग) में भव्य रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शहरी विकास विभाग एवं खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के मंत्री भोजराज राई मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। वहीं सिक्किम विधानसभा की उपाध्यक्ष राज कुमारी थापा, सालघारी-जूम क्षेत्र के विधायक मदन सिंचुरी, आईटीएस के उपाध्यक्ष सीपी शर्मा सहित कई विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम में मौजूद रहे।
सभा को संबोधित करते हुए मंत्री भोजराज राई ने कहा कि प्रत्येक धर्म की परंपरा और संस्कृति को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं की रक्षा और संरक्षण में समाज की सक्रिय भूमिका पर बल दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि यह धर्म अत्यधिक कट्टरपंथी होने के कारण कुछ विषयों में सरलीकरण की आवश्यकता है। उन्होंने विभिन्न स्थानों से आए संतों और श्रद्धालुओं से अपने-अपने क्षेत्रों में गुरु ज्ञानदिल धाम का प्रचार-प्रसार करने का आग्रह किया। मंत्री ने कहा कि लुप्तप्राय इस प्राचीन धर्म के पुनरुत्थान के लिए वर्तमान सरकार द्वारा यहां विशाल संरचनाओं का निर्माण कराया गया है, जिसका सदुपयोग संतों और अनुयायियों को करना चाहिए। उन्होंने भविष्य में इसी परिसर में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
आयोजन समिति के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने कहा कि इस वर्ष गुरु ज्ञानदिल दास की 205वीं जयंती भी मनाई जा रही है, जिससे कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया है। उन्होंने घोषणा की कि अब राष्ट्रीय जोसमनी संत साहित्य सम्मेलन का आयोजन प्रत्येक वर्ष किया जाएगा तथा धाम के विकास की विस्तृत रूपरेखा भी तैयार की जाएगी। उन्होंने गुरु ज्ञानदिल दास की शिक्षाओं, आध्यात्मिक विचारधारा तथा समाज के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। साथ ही धाम के विकास में निरंतर सहयोग के लिए मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के प्रति आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन के अंतर्गत आयोजित विभिन्न सत्रों में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विद्वानों और प्रोफेसरों ने संत ज्ञानदिल दास के जीवन, साहित्य और दर्शन पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इनमें नवीन पौड्याल, विमल चंद्र राई, डॉ. विनुपा राई, डॉ. राजकुमार छेत्री, डॉ. टेकबहादुर छेत्री, डॉ. शिवकुमार नेपाल, पीएम चामलिंग, प्रो. कबीर बस्नेत, डॉ. प्रेम चंद्र राई, डॉ. यादव सापकोटा तथा रामप्रसाद राई प्रमुख रहे।
सम्मेलन को आईटीएस के उपाध्यक्ष सीपी शर्मा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में सिक्किम राज्य बैंक के सलाहकार वीरेन राई, सिक्किम मिल्क यूनियन के अध्यक्ष यम कुमार मिश्र, दार्जिलिंग, डुआर्स, सिक्किम एवं नेपाल से आए संत-महात्मा, साहित्यकार, विद्यार्थी तथा आयोजन समिति के सदस्यों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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