मंगन : मंगन जिले में टीकाकरण, प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य समेत अन्य गतिविधियों के प्रदर्शन की समीक्षा हेतु आज डीसी अनंत जैन की अध्यक्षता में डीएसी में जिला टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मंगन नगर पंचायत अध्यक्ष छिरिंग डोमा भूटिया, नागा जिला पंचायत की डिकी ल्हामू लेप्चा, सिंगहिक जिला पंचायत अकिट लेप्चा, सीएमओ डॉ अनीता भूटिया, शिक्षा उप निदेशक पिंछो ताशी लेप्चा, डीआरसीएचओ (उत्तर) डॉ छिरिंग लाचेनपा, वरिष्ठ डीपीएचएनओ पादेन भूटिया, डीआईओ राज शर्मा, एलएचवी नोरके खांडू लेप्चा, डीब्यूसी मिंग्मा वाई शेरपा, स्वास्थ्य शिक्षक टीटी भूटिया और जोंगू आईसीडीएस पर्यवेक्षक दावा डिकी शेरपा ने भाग लिया।
बैठक की शुरुआत में डीआरसीएचओ (उत्तर) डॉ लाचेनपा द्वारा जिले में पिछले वत्त वर्ष के लिए टीकाकरण, प्रजनन और बाल स्वास्थ्य, और पीसीपीएनडीटी गतिविधियों के वार्षिक प्रदर्शन पर विस्तृत प्रस्तुति दी। इस दौरान, उन्होंने जिले में एएनसी पंजीकरण की स्थिति पर प्रकाश डाला और गर्भावस्था के पहले तीन महीनों के दौरान ही पंजीकरण कराने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने आगे संस्थागत प्रसव, बच्चों के टीकाकरण, एमआरसीवी 1 और एमआर 2 कवरेज, पूरक ओआरएस, जिंक और आयरन फोलिक गोलियों के वितरण, साथ ही जिले में पता चले एमआर मामलों की संख्या और आगामी स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों पर जिले की स्थिति प्रस्तुत की।
बैठक में, जिले के कुछ क्षेत्रों में घटते लिंगानुपात, विशेष रूप से कन्या जन्म में आई कमी के संबंध में विशेष चिंता व्यक्त की गई। इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा में वार्ड प्रतिनिधियों, जिला पंचायतों और पर्यवेक्षकों से आग्रह किया गया कि वे उचित सर्वेक्षण करें और अपने-अपने वार्डों की बारीकी से निगरानी करें। बैठक में इस मुद्दे को सुलझाने और समाज में लैंगिक संतुलन बनाए रखने के लिए सामूहिक सतर्कता, जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया।
डॉ लाचेनपा ने यह भी बताया कि विभाग द्वारा जागरूकता अभियान, टीकाकरण कवरेज और सक्रिय निगरानी के जरिए जिले को खसरा-रूबेला मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
इसके बाद, डीञ्चयूसी-सह-डीपीएम मिंग्मा शेरपा ने जिले में राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों की स्थिति प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि एनञ्चयूएएस प्रमाणन का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना और मरीजों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि जिले में 19 एचडद्ब्रल्यूसी-एसएचजी में से 10 को पहले ही प्रमाणित किया जा चुका है, जबकि 5 में से 2 ने प्रमाणन का दर्जा हासिल कर लिया है।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला गया। इसमें इस बात पर भी ज़ोर दिया गया कि गर्भावस्था के नौ महीनों के दौरान मां और बच्चे दोनों की उचित देखभाल और निगरानी के लिए कम से कम चार जांचें कराने की सलाह दी जाती है। बैठक का समापन जिले भर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य अधिकारियों, शैक्षणिक संस्थानों, वार्ड प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वित प्रयासों पर जोर देने के साथ हुआ।
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