पाकिम : कृषि एवं उद्यान विभाग द्वारा आत्मा, कृषि विज्ञान केंद्र तथा सीएईपीएचटी, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से डुगा प्रखंड के पश्चिम पेंदाम में बुधवार को ‘खेती बचाओ अभियान’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना, मृदा संरक्षण, कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन तथा किसानों के कल्याण के प्रति जागरुकता फैलाना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि एवं उद्यान विभाग के अधिकारियों तथा स्थानीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में पंचायत अध्यक्ष निर्मल बजगाईं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विभाग की उपनिदेशक संगीता बस्नेत के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने खेती बचाओ अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए क्लस्टर आधारित खेती को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि बेहतर उत्पादन और कृषि की स्थिरता के लिए किसानों को सामूहिक खेती की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य और उर्वरता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भूमि की उत्पादकता बनाए रखना दीर्घकालिक कृषि विकास के लिए बेहद जरूरी है। साथ ही जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़े पैमाने पर सामूहिक खेती से इस चुनौती को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को कुट्टू, मिलेट्स जैसे उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती अपनाने तथा विभाग की विभिन्न योजनाओं और कृषि इनपुट्स का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
पश्चिम पेंदाम एफपीओ के अध्यक्ष टंकनाथ बजगाईं ने बताया कि एफपीओ के अंतर्गत अब तक 200 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि स्थानीय किसानों की उपज को रंगपो स्थित इफको प्रसंस्करण केंद्र तक पहुंचाया जा रहा है तथा एफपीओ के माध्यम से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की पहल भी की जा रही है। सीएईपीएचटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एसके शत्पथी ने किसानों को कृषि यंत्रीकरण के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि श्रमिकों की कमी को देखते हुए किसानों को पावर टिलर और आधुनिक कृषि उपकरणों का उपयोग बढ़ाना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके संस्थान में पावर टिलर की मरम्मत एवं रखरखाव से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं। साथ ही धान की सीधी बुवाई के लिए ड्रम सीडर जैसे पोर्टेबल उपकरणों के उपयोग की भी जानकारी दी। उन्होंने किसानों के लिए रानीपूल स्थित संस्थान का शैक्षणिक भ्रमण आयोजित करने का आग्रह भी किया।
सीएईपीएचटी के प्रोफेसर एस जेना ने खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चिप्स, छुर्पी, बेकरी उत्पाद, नूडल्स और अचार जैसे उत्पाद तैयार कर किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ श्रावणी ने किसानों को किसान सारथी ऐप और किसान सुविधा ऐप के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किसान फसल संबंधी समस्याओं की तस्वीर अपलोड कर विशेषज्ञों से तत्काल सलाह प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने रोपाई से पहले बीज एवं पौध उपचार के महत्व पर भी प्रकाश डाला तथा कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन एवं विपणन संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी।
उद्यान विभाग के संयुक्त निदेशक जेएन शर्मा ने कहा कि खेती बचाओ अभियान केवल कृषि भूमि को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण से भी जुड़ा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही एफपीओ के माध्यम से किसानों के जैविक उत्पादों को पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग में बाजार तक पहुंचाने की पहल की जाएगी। उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती की पद्धतियों को पुनर्जीवित करने तथा खेतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने यह भी बताया कि एमआईडीएच योजना के तहत केला, अमरूद, पपीता, एवोकाडो, कीवी समेत विभिन्न फसलों के पौधे वितरित किए जा रहे हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए संयुक्त भूमि अभिलेखों को एकल नाम पर परिवर्तित कराने का भी सुझाव दिया। शर्मा ने कहा कि वन्यजीवों से प्रभावित किसान पंचायत के माध्यम से संयुक्त आवेदन देकर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से सहायता मांग सकते हैं। उन्होंने युवाओं से कृषि और मिट्टी से जुड़ाव बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों को भी खेती के प्रति प्रेरित करने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि पंचायत अध्यक्ष निर्मल बजगाईं ने विभाग को इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने किसानों से कृषि संबंधी योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया। कार्यक्रम का समापन कृषि सेविका दोरजी डोमा भूटिया द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं किसानों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
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