ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़े भारत: पीएम मोदी

'उर्वरक की कमी न हो, नाविक सुरक्षित रहें'

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि देश के नागरिकों और विदेशों में रह रहे भारतीयों के हितों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएं। साथ ही ऊर्जा और उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने तथा भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएं।

बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष के प्रभावों की समीक्षा करने के लिए बुलाई गई थी। इसमें ऊर्जा और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए गए कदमों का आकलन किया गया। साथ ही भारतीय नाविकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक के दौरान आगामी रबी सीजन के लिए उर्वरकों की संभावित आवश्यकता का आकलन किया गया। इसके अलावा उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में वैकल्पिक स्रोतों पर भी विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो और उर्वरकों की आपूर्ति बिना किसी बाधा के जारी रहे। इसके लिए सभी आवश्यक कदम समय रहते उठाए जाएं।

संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय और विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी बैठक में गंभीरता से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि नाविकों और उनके परिवारों को समय-समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराने, आपातकालीन सहायता प्रदान करने तथा जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग की व्यवस्था के लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए। यह समीक्षा मिडिल ईस्ट क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों पर बढ़ते हमलों के मद्देनज़र की गई।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने सौर ऊर्जा समेत अन्य गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया, ताकि भविष्य में बाहरी संकटों का असर देश पर कम से कम पड़े।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह की वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों को समन्वित तरीके से कार्य करना होगा। उन्होंने निर्देश दिया कि भारतीय नागरिकों के हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक निर्णय तेजी से लागू किए जाएं तथा सभी घटनाक्रमों की नियमित निगरानी के लिए एकीकृत और प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए।

कैबिनेट सचिव ने बैठक में मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि एलएनजी, एलपीजी, उर्वरकों और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि एलपीजी आयात के स्रोतों में पहले ही विविधता लाई जा चुकी है और देश में प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार तथा आपूर्ति की स्थिति फिलहाल संतोषजनक बनी हुई है।

उन्होंने बताया कि कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियां अपनी स्थापित क्षमता से भी अधिक उत्पादन कर रही हैं। इससे पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन लगातार जारी है। साथ ही पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शनों के विस्तार के लिए भी तेजी से काम किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप देश में पीएनजी उपभोक्ताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

कैबिनेट सचिव ने बताया कि सरकार राष्ट्रीय गैस ग्रिड के विस्तार, एलएनजी आयात क्षमता और री-गैसीफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का विस्तार करने तथा ‘पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर ऑर्डर, 2026’ के तहत निर्धारित समयसीमा में पाइपलाइन और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मंजूरी देने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इन प्रयासों से उद्योगों में एलपीजी के विकल्पों को अपनाने में भी मदद मिलेगी।

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