नई दिल्ली । पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने दिल्ली में होने वाले प्रदर्शनों और कानून-व्यवस्था को लेकर कई अहम सुझाव दिए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में उन्होंने कहा कि उन्होंने एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में प्रदर्शन स्थलों, संसद की सुरक्षा, पुलिस की भूमिका और तकनीक के इस्तेमाल को लेकर छह प्रमुख सुझाव रखे हैं।
किरण बेदी ने सुझाव दिया कि सभी आंदोलनों और प्रदर्शनों के लिए रामलीला मैदान को निर्धारित स्थल बनाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक यहां पर्याप्त जगह उपलब्ध है और प्रदर्शन की अनुमति भी केवल इसी स्थान के लिए दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख व्यावसायिक इलाकों को तोड़फोड़ और अव्यवस्था से बचाया जा सकेगा।
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि आंदोलनों को संसद भवन के प्रवेश द्वारों से दूर रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मामला है। उन्होंने जोर दिया कि प्रदर्शनकारियों को संसद परिसर के आसपास पहुंचने से रोकने के लिए स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
किरण बेदी ने कहा कि प्रदर्शन से निपटने के लिए पहली और दूसरी सुरक्षा पंक्ति में सिविल डिफेंस के स्वयंसेवकों और महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाना चाहिए। उन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक शैली की सशस्त्र लाठीचार्ज पुलिस व्यवस्था से बचने की सलाह देते हुए कहा कि दंगा नियंत्रण पुलिस (रायट पुलिस) का इस्तेमाल केवल अंतिम विकल्प के तौर पर होना चाहिए, न कि शुरुआत में।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रदर्शनों की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाए, जिन्हें कंट्रोल रूम से जोड़ा जाए। इससे प्रदर्शनकारियों और पुलिस, दोनों की गतिविधियों की वास्तविक समय (रियल-टाइम) में रिकॉर्डिंग और निगरानी की जा सकेगी। उनके अनुसार इससे किसी भी विवाद की स्थिति में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
किरण बेदी ने कहा कि तकनीक आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम की मदद से उपद्रव करने वाले और आपराधिक रिकॉर्ड रखने वाले लोगों की पहचान की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे लोगों के खिलाफ उनकी जमानत रद्द कराने और जमानतदारों की जमानत राशि जब्त करने जैसी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में हिंसक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
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