मंगन : कृषि विभाग द्वारा किसानों के बीच टिकाऊ कृषि, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे माहव्यापी खेत बचाओ अभियान के तहत सोमवार को रिंगहिम नामपताम जीपीयू में जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य पिंकीला पेंचुंगपा, पंचायत अध्यक्ष शेराप भूटिया, मंगन के बीडीओ कैलाश थापा, केवीके के मृदा विज्ञान विशेषज्ञ पालदेन भूटिया, कृषि विभाग के उपनिदेशक प्रणीत गुरुंग, पंचायत सदस्य तथा बड़ी संख्या में स्थानीय किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विभाग के उपनिदेशक प्रणीत गुरुंग ने वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस योजना का उद्देश्य सीमावर्ती गांवों में बेहतर आधारभूत संरचना, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा किसानों को सशक्त सहायता सेवाएं उपलब्ध कराकर ग्रामीण आजीविका और कृषि विकास को मजबूत बनाना है। उन्होंने प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे कृषि उत्पादकता बढ़ती है, फसल क्षति कम होती है और वर्षभर सब्जियों का उत्पादन संभव हो पाता है।
इस अवसर पर किसानों के बीच सब्जी बीज, नीम आधारित जैव कीटनाशक तथा फेरोमोन ट्रैप का वितरण किया गया। अधिकारियों ने इन कृषि आदानों के प्रभावी उपयोग की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इनके माध्यम से पर्यावरण अनुकूल कीट प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा, रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी तथा सुरक्षित एवं टिकाऊ कृषि उत्पादन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
केवीके के मृदा विज्ञान विशेषज्ञ पालदेन भूटिया ने खेत बचाओ अभियान के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए किसानों से मृदा उर्वरता बनाए रखने, इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट अपनाने तथा वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इससे दीर्घकालिक उत्पादकता और कृषि स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है। जिला पंचायत सदस्य पिंकीला पेंचुंगपा ने किसानों तक सीधे पहुंचकर जागरूकता फैलाने के लिए कृषि विभाग की सराहना की।
उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं में सक्रिय भागीदारी निभाने तथा उपलब्ध कराई जा रही तकनीकों और संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाने का आग्रह किया। पंचायत अध्यक्ष शेराप भूटिया ने कृषि भूमि के संरक्षण और क्षेत्र की कृषि परंपरा को बनाए रखने में सामुदायिक सहभागिता की अहम भूमिका पर बल दिया। उन्होंने किसानों से आधुनिक और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार कृषि पद्धतियां अपनाने की अपील की।
बीडीओ कैलाश थापा ने ऐसे जागरुकता कार्यक्रमों के आयोजन के लिए कृषि विभाग की प्रशंसा करते हुए कहा कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से ग्रामीण आजीविका, खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम के अंत में संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें किसानों ने खेती से जुड़ी अपनी समस्याओं और चुनौतियों को अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के समक्ष रखा। विशेषज्ञों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।
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