पेपर लीक पर सियासत तेज, राहुल गांधी ने युवाओं के मुद्दों को बनाया हथियार

नई दिल्ली । लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की हालिया राजनीतिक गतिविधियों और सोशल मीडिया पोस्टों का विश्लेषण एक दिलचस्प रुझान दिखाता है। पिछले 20 दिनों में राहुल गांधी ने जिन मुद्दों को सबसे अधिक प्राथमिकता दी है, उनमें नीट, सीबीएसई, पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली और छात्रों का भविष्य सबसे ऊपर रहा है।

ऐसे मुद्दे, जो सीधे तौर पर देश की जेन जेड पीढ़ी यानी स्कूल, कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को प्रभावित करते हैं। यह फोकस सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस के छात्र और युवा संगठनों की गतिविधियों में भी साफ दिखाई देता है।

11 मई से 1 जून के बीच राहुल गांधी ने एक्स पर कुल 47 पोस्ट किए। इनमें से 26 पोस्ट सीधे तौर पर नीट, परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, सीबीएसई या छात्रों से जुड़े मुद्दों पर थे। यानी इस अवधि में उनके कुल पोस्टों का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा और युवाओं से जुड़े सवालों पर केंद्रित रहा।

इसी अवधि में इंस्टाग्राम पर राहुल गांधी ने कुल 32 पोस्ट किए। इनमें से 16 पोस्ट नीट, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के मुद्दों से संबंधित थे। यानी इंस्टाग्राम पर उनकी ठीक 50 प्रतिशत पोस्ट ऐसे विषयों पर रहीं जो सीधे तौर पर युवाओं और छात्रों को प्रभावित करते हैं।

राजनीतिक तौर पर यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राहुल गांधी लंबे समय से बेरोजगारी और युवाओं के मुद्दे उठाते रहे हैं, लेकिन हाल के हफ्तों में उनका विशेष फोकस परीक्षा प्रणाली और शिक्षा व्यवस्था पर दिखाई देता है। इसकी एक वजह यह भी है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। इन घटनाओं ने लाखों छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच असंतोष पैदा किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेन जेड के लिए शिक्षा, परीक्षा और रोजगार सिर्फ नीतिगत मुद्दे नहीं बल्कि उनके व्यक्तिगत भविष्य से जुड़े सवाल हैं। राहुल गांधी के हालिया सोशल मीडिया अभियान में इन्हीं विषयों को प्रमुखता मिलती दिखाई दे रही है।

राहुल गांधी ने हाल के दिनों में कई पोस्ट के जरिए नीट परीक्षा से जुड़े विवादों, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य पर सवाल उठाए। उन्होंने यह तर्क दिया कि जब मेहनत करने वाले छात्रों को निष्पक्ष अवसर नहीं मिलता तो उसका असर सिर्फ व्यक्तिगत करियर पर नहीं बल्कि देश के भविष्य पर भी पड़ता है।

हाल ही में उन्होंने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चयन प्रक्रिया में तकनीकी मानकों को बदला गया और इससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को भी लगातार मुद्दा बनाया।

दिलचस्प बात यह है कि राहुल गांधी के सोशल मीडिया अभियान के साथ-साथ कांग्रेस के संगठनात्मक कार्यक्रमों में भी इसी तरह का फोकस दिखाई देता है। यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई ने हाल के दिनों में शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर कई प्रदर्शन किए हैं। यूथ कांग्रेस इन मुद्दों पर लगभग सभी राज्यों की राजधानियों में प्रदर्शन कर चुकी है और अब पार्टी सूत्रों के मुताबिक एक व्यापक देशव्यापी अभियान की तैयारी भी चल रही है। वहीं एनएसयूआई ने विभिन्न राज्यों में परीक्षा घोटालों और पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए हैं।

कांग्रेस के भीतर इसे एक व्यापक राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी मानती है कि आज का युवा मतदाता पारंपरिक राजनीतिक मुद्दों से अधिक उन सवालों पर प्रतिक्रिया देता है जो सीधे उसके जीवन और भविष्य को प्रभावित करते हैं। शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं और अवसरों की समानता ऐसे ही मुद्दे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत में जेन जेड मतदाता अब चुनावी राजनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सोशल मीडिया पर सक्रिय यह वर्ग सूचना भी मुख्य रूप से डिजिटल माध्यमों से प्राप्त करता है और अपने करियर से जुड़े मुद्दों पर अधिक संवेदनशील रहता है। यही कारण है कि राहुल गांधी के हालिया संदेशों में आर्थिक असमानता, बेरोजगारी और शिक्षा के साथ-साथ परीक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर दिखाई दे रहा है।

कांग्रेस की रणनीति को देखें तो यह केवल सरकार की आलोचना तक सीमित नहीं है। पार्टी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और छात्रों के लिए बेहतर अवसरों जैसे मुद्दों को एक बड़े राजनीतिक नैरेटिव में बदलने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी के सोशल मीडिया पोस्ट और कांग्रेस संगठनों की गतिविधियां इसी दिशा में संकेत देती हैं।

पिछले 20 दिनों के आंकड़े इस रुझान को और स्पष्ट करते हैं। एक्स पर 47 में से 26 और इंस्टाग्राम पर 32 में से 16 पोस्ट छात्रों, परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर रहे। यानी दोनों प्लेटफॉर्म पर लगभग हर दूसरा पोस्ट युवाओं के सवालों को केंद्र में रखकर किया गया।

आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस इस डिजिटल फोकस को एक बड़े राजनीतिक अभियान में बदल पाती है। फिलहाल इतना जरूर है कि राहुल गांधी की हालिया राजनीति में जेन जेड, छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे केंद्र में दिखाई दे रहे हैं, और पार्टी संगठन भी उसी दिशा में कदम बढ़ाता नजर आ रहा है।

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