गंगटोक : सिक्किम के 51वें राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग ने राज्य वासियों को शुभकामनाएं दी हैं। चामलिंग ने इसे ऐतिहासिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि यह सिक्किम और उसके भविष्य के प्रति हमारी सामूहिक जिम्मेदारियों पर विचार करने का भी एक क्षण है।
चामलिंग ने अपने संदेश में कहा, सिक्किम की यह यात्रा शांति, एकता, सद्भाव और सिक्किम वासियों की कई पीढय़िों की कड़ी मेहनत पर आधारित है। यह प्रगति और विकास को अपनाने के साथ-साथ भारत के संविधान में निहित अद्वितीय संवैधानिक सुरक्षा उपायों की रक्षा करने पर आधारित है। उन्होंने कहा, 1975 में इसी दिन सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना था। तब से लेकर अब तक, सिक्किम ने शांति, प्रगति और राष्ट्रीय एकता की एक असाधारण यात्रा तय की है। इसी दिन, भारतीय संविधान में अनुच्छेद 371एफ को एक ‘नॉन ऑब्सटैन्टे क्लॉज’ के रूप में शामिल किया गया था, जिसने भारतीय गणराज्य के भीतर सिक्किम के पुराने कानूनों, विशेष दर्जे, अधिकारों, पहचान और अद्वितीय ऐतिहासिक स्वरूप की सुरक्षा सुनिश्चित की। यह संवैधानिक सुरक्षा सिक्किम की राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता की सबसे मजबूत नींवों में से एक बनी हुई है और इसकी रक्षा तथा इसे संरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
एसडीएफ नेता ने कहा, सिक्किम राज्य बनने के इन 51 वर्षों में से, मुझे इस बात का गहरा गौरव है कि हमें एसडीएफ सरकार के नेतृत्व में लगातार 25 वर्षों तक राज्य का नेतृत्व करने का अवसर मिला। अपने कार्यकाल के दौरान, हमने सिक्किम की जनता की सेवा करने, सिक्किम की अद्वितीय पहचान और दर्जे की रक्षा करने, तथा एक शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समृद्ध राज्य के निर्माण हेतु पूर्ण समर्पण और निष्ठा के साथ कार्य किया।
अपने संदेश में पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, वर्ष 2016 में सिक्किम विश्व का पहला पूर्णत: ‘जैविक राज्य’ बना। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने सिक्किम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने 2018 में एफएओ और संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रदान किये गये प्रतिष्ठित ‘फ्यूचर पॉलिसी गोल्ड अवार्ड’, 2017 में मिले ‘वन वर्ल्ड अवार्ड’ (ग्रैंड प्रिक्स) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमारे कार्यकाल की एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि गरीबी के स्तर में की गई तीव्र कमी थी। उन्होंने कहा, हमने खुद को एक ‘गरीबी-मुक्त राज्य’ और देश का पहला ‘कच्चे घरों से मुक्त राज्य’ बनाने का गौरव हासिल किया। हमने हर घर तक साफ़-सफ़ाई की सुविधाएं पहुंचाने पर भी जोर दिया, जिससे सिक्किम भारत का पहला ‘खुले में शौच-मुक्त’ राज्य बन गया। इस उपलब्धि को देखते हुए, वर्ष 2008 में सिक्किम को देश का पहला ‘निर्मल राज्य’ घोषित किया गया। एसडीएफ सरकार के कार्यकाल में, सिक्किम में सड़कों का जाल लगभग हर जगह तक पहुंच गया था। देश में सबसे ज्यादा सड़क घनत्व वाले राज्यों में से एक होने के लिए, इस राज्य को ‘भारत निर्माण पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
चामलिंग ने कहा कि एसडीएफ सरकार के शासनकाल में सिक्किम की अर्थव्यवस्था में भी अभूतपूर्व विकास और स्थिरता देखने को मिली और राज्य का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 1994 के 440.34 करोड़ से बढक़र वर्ष 2019 तेजी से विकास करने वाले राज्यों में से एक बन गया। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य में औद्योगीकरण की नींव रखने, सामाजिक संकेतकों में जबरदस्त सुधार होने, कॉलेज स्तर तक मुफ्त शिक्षा सुनिश्चित करने और अन्य उपलद्ब्रिधयों के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, एसडीएफ सरकार ने कई ऐतिहासिक पॉलिटिकल और सोशल कामयाबी भी हासिल कीं। आज, सिक्किम पूरे देश के लिए सबको साथ लेकर चलने वाली पॉलिटिक्स की एक मिसाल है, क्योंकि इसकी नीतियों ने हर कम्युनिटी के लिए रिप्रेजेंटेशन और मौके पक्के किए।
इसके अलावा, चामलिंग ने 2006 में 44 सालों तक बंद रहने के बाद ऐतिहासिक नाथुला ट्रेड रूट फिर से खोलने को भी उपलद्ब्रिध बताया। उन्होंने कहा कि इससे सिक्किम का सदियों पुराना व्यापार और स्ट्रेटेजिक महत्व फिर से वापस आ गया। एक और बड़ी उपलब्धि 2008 में स्टेट इनकम टैक्स और सेंट्रल इनकम टैक्स से छूट मिलना था। सिक्किम 2002 में नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल का सदस्य भी बना। चामलिंग ने कहा, ये सभी उपलब्धियां सबसे महत्वपूर्ण रूप से सिक्किम के मेहनती और जुझारू लोगों के कारण ही संभव हो पाई हैं। हमारे किसान, युवा, महिलाएं, सरकारी कर्मचारी, उद्यमी, बुद्धिजीवी और हर वह नागरिक जिसने एक बेहतर राज्य के निर्माण में योगदान दिया है। ऐसे में, उन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर पर भावी पीढिय़ों के लिए इन नींवों को संरक्षित और मजबूत करने के अपने सामूहिक संकल्प का आह्वान किया। उन्होंने सिक्किम के आने वाली कई पीढि़यों तक शांति, गरिमा और एकता के साथ प्रगति करने की कामना भी की।
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