गर्भवती महिला की मौत मामले में सरकार ने गठित किया स्वतंत्र जांच आयोग

गंगटोक : स्‍वास्‍थ्‍य तथा परिवार कल्‍याण विभाग ने गर्भवती महिला और उसके जुड़वां अजन्मे शिशुओं की हालिया मृत्यु के मामले में आज एसटीएनएम अस्पताल के सम्मेलन कक्ष में एक प्रेस वार्ता आयोजित की। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव छेवांग ग्‍याछो ने मामले की जांच के लिए गठित समिति की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि 6 मई 2026 को महिला की मृत्यु की खबर सामने आने के बाद 8 मई को जांच समिति गठित करने का आदेश जारी किया गया था। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच समिति में डॉ. पेमा सेडान लेप्चा, डॉ. सुरेश मदन रसाईली, सेंट्रल रेफरल हॉस्पिटल की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष, उप सचिव पूजा लोहार तथा स्वास्थ्य विभाग की अवर सचिव प्रतीक्षा शर्मा शामिल हैं। हालांकि, सिक्किम सरकार के मुख्य सचिव आर तेलंग ने मामले की समीक्षा करते हुए शनिवार को एक बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें स्वास्थ्य विभाग से बाहर के सदस्यों को शामिल करते हुए एक स्वतंत्र जांच आयोग गठित करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद पहले गठित समिति को निरस्त कर दिया गया। सरकार की अधिसूचना के अनुसार गठित पांच सदस्यीय जांच आयोग मरीज के उपचार और सिक्किम से बाहर उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर किए जाने से संबंधित घटनाक्रम की जांच करेगा। आयोग की अध्यक्षता एन श्रीधर राव करेंगे। अन्य सदस्यों में डॉ. पेमा सेदेन लेप्चा, डॉ. सुरेश मदन रसाइली, डॉ. अनूप प्रधान तथा कार्मिक विभाग के विशेष सचिव महेश शर्मा शामिल हैं। महेश शर्मा आयोग के सदस्य सचिव होंगे।

प्रेस वार्ता में डॉ. सुरेश मदन रसाइली ने बताया कि महिला नोबलस्ट्राइड फर्टिलिटी एंड डायग्नोस्टिक सेंटर में बांझपन संबंधी उपचार करा रही थी। उन्होंने कहा कि महिला को दो बार एसटीएनएम अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया था। पहली बार 2 मार्च 2026 को भर्ती कराया गया, जब वह जुड़वां बच्चों के साथ लगभग चार माह की गर्भवती थी। उस समय उसे अत्यधिक रक्तस्राव और गर्भपात की आशंका जैसी जटिलताएं थीं। साथ ही प्लेसेंटा की स्थिति भी गंभीर थी। डॉ. रसाइली ने बताया कि चूंकि गर्भधारण आईवीएफ प्रक्रिया से हुआ था और मामला अत्यधिक जोखिमपूर्ण था, इसलिए चिकित्सकों ने परिवार से परामर्श कर गर्भ को सुरक्षित रखने का प्रयास किया। दवाइयों से मरीज की स्थिति स्थिर की गई और उसे अस्पताल में भर्ती रहने की सलाह दी गई, लेकिन परिवार ने आगे अस्पताल में रहने से इनकार कर दिया। इसके बाद 9 मार्च को मरीज को छुट्टी दे दी गई।

उन्होंने बताया कि इसके बाद कोई फॉलोअप नहीं कराया गया। उन्होंने बताया कि महिला को 4 अप्रैल 2026 को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जब वह लगभग पांच माह की गर्भवती थी। उपचार के बावजूद गर्भ में एम्नियोटिक फ्लूइड लगातार कम होता गया, हालांकि रक्तस्राव नियंत्रित हो गया था। डॉक्टरों ने मरीज की स्थिति स्थिर होने पर बेहतर इलाज और गर्भ को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उसे सिक्किम से बाहर फिटल मेडिसिन विशेषज्ञ वाले डायग्नोस्टिक सेंटर में रेफर किया। इसके बाद 22 अप्रैल को मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मनी गुरुंग ने बताया कि महिला लगभग 16 सप्ताह की गर्भावस्था के दौरान पहली बार अस्पताल पहुंची थी। इससे पहले वह आईवीएफ विशेषज्ञ की देखरेख में थी। उन्होंने कहा कि भ्रूण की स्थिति अत्यधिक संवेदनशील थी तथा उस समय भ्रूण का वजन लगभग 350 से 400 ग्राम था। इसलिए मरीज को विशेष विशेषज्ञता वाले फिटल मेडिसिन विशेषज्ञों के पास रेफर किया गया था। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव छेवांग ग्याछो ने बताया कि जांच आयोग को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

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