पीआईबी की ‘वार्ता’ में 12 वर्षों की विकास यात्रा पर चर्चा

  • ‘विकास भी, विरासत भी’ ने देश को दी नई पहचान : अन्नपूर्णा आले
  • विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा देश : योगेन तमांग

गंगटोक : प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी), गंगटोक द्वारा शुक्रवार को “12 साल-विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के” विषय पर एक दिवसीय मीडिया संवाद कार्यक्रम ‘वार्ता’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय मीडिया प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों तथा राज्य सरकार के मीडिया अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों के शासन, विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम में सिक्किम सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सचिव अन्नपूर्णा आले मुख्य अतिथि तथा मुख्यमंत्री के प्रेस सचिव योगेन तमांग विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत पीआईबी एवं आकाशवाणी समाचार, गंगटोक के सहायक निदेशक मानस प्रतिम सरमा के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

वहीं, अपने संबोधन में प्रेस सचिव योगेन तमांग ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद देश में सुशासन और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिले हैं। पिछले 12 सालों में केंद्र सरकार की उपलब्धियां इतनी बड़ी हैं कि उन्हें एक छोटे कार्यक्रम में ठीक से बताया नहीं जा सकता, लेकिन वे काम में अच्छे शासन को दिखाती हैं। उन्होंने सिक्किम और वहां के लोगों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी। वहीं, मौजूदा शासन में एमएसएमई, स्टार्टअप, डिजिटल भुगतान प्रणाली और यूपीआई के विस्तार को महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताते हुए उन्होंने कहा कि आज यूपीआई ने आम लोगों के जीवन को सरल बनाया है और छोटे व्यापारियों से लेकर टैक्सी चालकों तक इसकी पहुंच हो चुकी है।

तमांग ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि सिक्किम से जुड़े मुद्दों और आवश्यकताओं को अब अधिक गंभीरता से सुना जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग की पहल ‘सुनहरे सिक्किम, समृद्ध सिक्किम’ को विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अन्नपूर्णा आले ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान शासन व्यवस्था, आधारभूत संरचना, तकनीकी नवाचार, सामाजिक कल्याण और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्रों में व्यापक बदलाव आए हैं। यह समय भारत की विकास यात्रा में एक अहम अध्याय है, जो भरोसे, विकास और जनता की भलाई से तय होती है। उन्होंने राष्ट्रीय महत्व के विषय पर चर्चा के लिए नीतियां बनाने वालों और मीडिया पेशेवरों को एक साथ लाने के लिए पीआईबी की प्रशंसा की।

भारत को एक आत्मविश्वासी, आकांक्षी और भविष्य के लिए प्रस्तुत देश के तौर पर उभरने वाला बताते हुए आले ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस, यूपीआई, वित्तीय समावेशन और सरकारी योजनाओं की अंतिम व्यक्ति तक पहुंच ने प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा तैयारी, सीमा ढांचे और आत्मनिर्भर भारत पर मजबूत फोकस ने एक अधिक मजबूत देश बनाया है। ये विकास, मुख्यमंत्री गोले के तहत आर्थिक प्रगति को पर्यावरणीय सतता और सांस्कृतिक सुरक्षा के साथ संतुलित करने के सिक्किम मॉडल से मेल खाते हैं। साथ ही, उन्होंने सिक्किम राज्य की स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान सचिवालय में एक टाइम कैप्सूल लगाने का भी जिक्र किया, जिसमें देसी बीज, हेरिटेज दस्तावेज और सांस्कृतिक कलाकृतियों को रखा गया था। इन्हें राज्य की 100वीं वर्षगांठ पर खोला जाएगा।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में सिक्किम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अमित चक्रवर्ती ने पिछले दशक को औसत भारतीय परिवार के लिए एक बदलाव लाने वाला सफर बताया, और वित्त मंत्रालय, एनपीसीआई, भारतीय रेलवे और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला दिया। उन्होंने जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुद्रा ऋण योजना और यूपीआई जैसी प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों ने करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने सिक्किम के विकास की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए सेवक-रंगपो रेल परियोजना और राज्य की जैविक पहचान को भविष्य की प्रगति के महत्वपूर्ण आधार बताया।

इसके साथ ही, प्रो चक्रवर्ती ने कहा कि 2016 से भारत का पहला पूरी तरह से जैविक राज्य होने का सिक्किम का दर्जा इस क्षेत्र को “मौकों का केंद्र” बनाता है। ‘विकसित भारत 2047’ की ओर देखते हुए, उन्होंने ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0’ का ज़िक्र किया, जिसके तहत धोलेरा में फैब्रिकेशन सुविधा 2028 तक शुरू करने का लक्ष्य है और कंप्यूटिंग क्षमता को 38,000 जीपीयू तक बढ़ाया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान संरचनात्मक सुधारों, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, आधारभूत विकास और जनकल्याणकारी नीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

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