नई दिल्ली । परिसीमन विधेयक को संसद में पारित कराने के प्रयास में मिली करारी हार के बाद, सरकार एक बार फिर से इस विधेयक को लाने और साथ ही 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले एक राष्ट्र एक चुनाव विधेयक लाने की तैयारी में जुट गई है। इसके लिए पश्चिम बंगाल में मिली जीत से उत्साहित भाजपा, संसद में एक-बार फिर से जोड़-तोड़ में लग गई है। यह सब तब हो रहा है जब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकार को कोई भी कदम उठाने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और सभी राजनीतिक दलों से परामर्श करना चाहिए।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्रीय गृह मंत्रालय एक नया परिसीमन विधेयक तैयार कर रहा है। यह नया प्रयास अप्रैल-मई में हुए विधानसभा चुनावों के बाद आया है, जिसने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में टीएमसी और डीएमके को करारा झटका दिया और विपक्षी समीकरणों को ध्वस्त कर दिया।
यह नया प्रयास अप्रैल-मई में हुए विधानसभा चुनावों के बाद आया है, जिसने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में टीएमसी और डीएमके को करारा झटका दिया और विपक्षी समीकरणों को बाधित कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, डीएमके की करारी हार और कांग्रेस के टीवीके सरकार में शामिल होने के बाद, पार्टी के भीतर कुछ ऐसे नेता हैं जो भाजपा के साथ “कुछ खास मुद्दों” पर बातचीत करने को तैयार हैं।
वहीं दूसरी ओर, भाजपा पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर बढ़ते मतभेदों और उसके नेतृत्व के खिलाफ बढ़ते गुस्से पर पैनी नजर रख रही है। संसद में इन मुद्दों का क्या और कब असर होगा, यह भी भाजपा की आगे की रणनीति का एक अहम पहलू है।
इसके समानांतर, लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने के उद्देश्य से लाए गए ‘एक राष्ट्र एक चुनाव विधेयक’ को औपचारिक रूप देने का काम चल रहा है। वर्तमान में, इसकी समीक्षा 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) कर रही है। एक नेता के मुताबिक विधेयक में जल्द ही संशोधन किया जाएगा। रिपोर्ट के संबंध में हम अच्छी प्रगति कर रहे हैं और हम समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत कर देंगे। जेपीसी का कार्यकाल मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक बढ़ा दिया गया है।
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