गुवाहाटी । असम विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने राज्य की अर्थव्यवस्था, समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और हालिया चुनाव नतीजों को लेकर कई अहम बयान दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार 2028 तक असम को 10 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योग, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और रोजगार के क्षेत्र में बड़े स्तर पर योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिससे राज्य की आर्थिक ताकत लगातार बढ़ रही है।
सदन में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने अपने वादे के मुताबिक पहले ही सत्र में यूसीसी विधेयक पेश किया है। उन्होंने कहा कि यह कदम इस बात का प्रमाण है कि सरकार अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरमा ने कहा कि महिलाओं को समान अधिकार और न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।
विधानसभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने हालिया असम चुनाव परिणामों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया है कि जनता ने व्यक्तिगत हमलों और प्रसिद्ध गायक जुबीन गर्ग की मौत के राजनीतिकरण को पूरी तरह नकार दिया। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि लोगों ने विकास और सकारात्मक राजनीति को समर्थन दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस चुनाव में एनडीए ने 102 सीटों तक पहुंच बनाई और गठबंधन के उम्मीदवारों को पिछले चुनाव की तुलना में 15 लाख अधिक वोट मिले। उन्होंने बताया कि बीजेपी उम्मीदवारों को 81.92 लाख से ज्यादा वोट मिले, जबकि एजीपी को 14 लाख और बीपीएफ को 8 लाख वोट प्राप्त हुए। कुल मिलाकर एनडीए ने एक करोड़ वोटों का आंकड़ा पार कर लिया।
सरमा ने कहा कि एनडीए ने सभी अनुसूचित जनजाति आरक्षित सीटों और चाय जनजाति बहुल सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों में से सिर्फ एक सीट छोड़कर बाकी सभी पर गठबंधन ने कब्जा जमाया।
मुख्यमंत्री ने बकरीद के दौरान कई ईदगाह समितियों द्वारा गाय की कुर्बानी से परहेज करने के फैसले की भी सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी धर्मग्रंथ में गायकी कुर्बानी को अनिवार्य नहीं बताया गया है और राज्य के कुछ बंगाली मुस्लिम संगठनों ने हिन्दू समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस बार वैकल्पिक पशुओं की कुर्बानी देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द की दिशा में ‘नए युग की शुरुआत’ बताते हुए कहा कि यदि यह पहल व्यापक स्तर पर लागू होती है तो राज्य में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और सामाजिक विश्वास को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा, असम में सभी समुदायों के बीच भाईचारा बना रहे, यह हमारी प्राथमिकता है। कई लोगों ने पहले ही यह निर्णय लिया है। बाकी लोग भी इससे प्रेरणा लें। असम में बकरीद से पहले आए इस बयान को राजनीतिक और सामाजिक रूप से अहम माना जा रहा है, क्योंकि राज्य में अवैध घुसपैठ, पहचान और सांप्रदायिक मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहे हैं। सरमा ने विधानसभा में यह भी दोहराया कि सरकार अगले पांच वर्षों में असम को विदेशी मुक्त बनाने के लक्ष्य पर काम करेगी और अवैध रूप से रह रहे विदेशियों की पहचान कर उन्हें निर्वासित किया जाएगा। वहीं, महंगाई के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय को गंभीरता से देख रही है और कीमतों पर नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
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