गंगटोक : Citizen Action Party (सीएपी) के नेता अल्बर्ट गुरुंग ने वन फैमिली वन जॉब (ओएफओजे) योजना तथा अन्य अस्थायी सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सिक्किम उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और सिक्किम की जनता की जीत बताया है।
बुधवार को गंगटोक में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में गुरुंग ने कहा कि यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्होंने अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दावा किया कि अदालत के निर्णय ने सार्वजनिक रोजगार से जुड़े मामलों में संवैधानिक सुरक्षा और विधिसम्मत प्रक्रिया के महत्व को पुनः स्थापित किया है।
गुरुंग ने आरोप लगाया कि ओएफओजे योजना के लाभार्थियों के अलावा अस्थायी, एडहॉक और मस्टर रोल (एमआर) आधार पर कार्यरत बड़ी संख्या में कर्मचारियों को बिना उचित कारण और कानूनी आधार के सेवा से हटा दिया गया था। उन्होंने कहा कि कई मामलों में बर्खास्तगी आदेशों में केवल यह लिखा गया था कि उनकी सेवाओं की अब आवश्यकता नहीं है, जबकि किसी प्रकार के कदाचार या सेवा नियमों के उल्लंघन का उल्लेख नहीं किया गया।
सीएपी नेता ने कहा कि यह फैसला स्पष्ट करता है कि संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती और सरकारी कर्मचारियों को मनमाने ढंग से सेवा से नहीं हटाया जा सकता। उनके अनुसार यह निर्णय केवल याचिकाकर्ताओं के लिए ही नहीं, बल्कि कानून के शासन और संवैधानिक व्यवस्था में विश्वास रखने वाले सभी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने दावा किया कि नौकरी जाने के बाद अनेक कर्मचारियों और उनके परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, जबकि उन्होंने कोई गलती नहीं की थी। कई कर्मचारियों ने अपनी बर्खास्तगी के कारणों को जानने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
मामले की पृष्ठभूमि बताते हुए गुरुंग ने कहा कि वर्ष 2023 में कार्मिक विभाग (डीओपी) के समक्ष इस मुद्दे को उठाया गया था। समाधान नहीं निकलने पर सीएपी के विधिक प्रकोष्ठ ने प्रभावित कर्मचारियों को 2025 में सिक्किम उच्च न्यायालय में रिट याचिकाएं दायर करने में सहायता प्रदान की।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में कर्मचारियों को केवल इसलिए सेवा से हटाया गया क्योंकि उनका संबंध सिटीजन एक्शन पार्टी से था या उनके परिवार के सदस्य विपक्षी दल से जुड़े थे। गुरुंग ने कहा कि यदि ऐसी प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया गया तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करेगी।
उन्होंने राज्य सरकार से अदालत के निर्देशों का पालन करने तथा समान परिस्थितियों वाले सभी कर्मचारियों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही याचिकाकर्ताओं, उनके परिवारों और मामले से जुड़े अधिवक्ताओं का आभार भी व्यक्त किया।
गुरुंग ने कहा कि यह फैसला राज्य के हजारों कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाएगा और न्यायपालिका के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत करेगा। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक सिक्किम उच्च न्यायालय का विस्तृत लिखित आदेश उपलब्ध नहीं हो पाया था।
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