पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी : सोंगमित लेप्चा

'जंगल, नदियां और पहाड़ बचाने के लिए उठे आवाज'

गंगटोक : सिटीजन एक्शन पार्टी-सिक्किम (सीएपी-सिक्किम) ने प्रसिद्ध अभिनेत्री और जलवायु संरक्षण की वैश्विक पैरोकार भूमि पेडनेकर के सिक्किम दौरे का स्वागत किया है। पार्टी ने उम्मीद जताई है कि भूमि पेडनेकर अपनी यात्रा के दौरान राज्य की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ यहां बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों को भी नजदीक से देखेंगी।

सीएपी-सिक्किम की महिला परिषद उपाध्यक्ष एवं सामाजिक पर्यावरण कार्यकर्ता सोंगमित लेप्चा ने कहा कि भूमि पेडनेकर भारतीय सिनेमा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जलवायु कार्रवाई के लिए भी जानी जाती हैं। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की राष्ट्रीय पैरोकार के रूप में उन्होंने युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि अपने ‘क्लाइमेट वॉरियर मूवमेंट’ के जरिए, भूमि पेडनेकर ने लाखों युवाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक जीवनशैली अपनाने, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने, वृक्षारोपण मुहिम का समर्थन करने और जलवायु पहलों में सक्रियता से भाग लेने के लिए प्रेरित किया है। वह मनोरंजन उद्योग में टिकाऊ तौर-तरीकों की भी जोरदार वकालत करती रही हैं और फिल्म प्रोडक्शन से पर्यावरण पर पड़ने वाले भारी असर की ओर ध्यान दिलाया है।

पार्टी ने कहा कि सिक्किम अपनी जैव विविधता, जैविक खेती और पर्यावरणीय नीतियों के लिए विश्व स्तर पर पहचाना जाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में राज्य गंभीर पर्यावरणीय संकटों का सामना कर रहा है। बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, नदी तटों पर अनियंत्रित खनन, पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ता दबाव, अवैज्ञानिक विकास कार्य और प्राकृतिक आवासों के नुकसान ने चिंता बढ़ा दी है।

सीएपी-सिक्किम नेता ने आगे कहा कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई, नदी किनारों पर बेरोकटोक खुदाई और खनन गतिविधियां, नाज़ुक पहाड़ी इकोसिस्टम पर बढ़ता दबाव, विकास के अवैज्ञानिक काम और प्राकृतिक आवासों का नुकसान से आम लोगों, पर्यावरणविदों और स्थानीय समुदायों के बीच गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसके अलावा, उन्होंने तीस्ता और रंगीत नदियों पर जलविद्युत परियोजनाओं और बांधों के प्रभाव को भी गंभीर मुद्दा बताया। उनके अनुसार, सुरंग निर्माण, नदी मोड़ और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास से हिमालयी क्षेत्र की पारिस्थितिक स्थिरता प्रभावित हो रही है।

सीएपी-सिक्किम महिला नेता ने अपने बयान में अक्टूबर 2023 की विनाशकारी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) त्रासदी का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आपदा ने हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को उजागर किया। इस घटना में जान-माल की भारी क्षति हुई और स्थानीय समुदायों तथा प्राकृतिक संसाधनों को गहरा नुकसान पहुंचा है।

ऐसे में, पार्टी ने भूमि पेडनेकर से अपील की कि वे सिक्किम की पर्यावरणीय वास्तविकताओं को समझते हुए राज्य के जंगलों, नदियों, पहाड़ों और जैव विविधता की रक्षा के लिए अपनी आवाज उठाएं। पार्टी ने कहा कि पर्यटन का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब वह पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार शासन के साथ आगे बढ़े। उन्होंने कहा, हमारा मानना है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण सुरक्षा भी जरूरी है। आज जो अद्भुत सुंदरता पर्यटकों को सिक्किम की ओर आकर्षित करती है, उसे केवल जिम्मेदार शासन, पारिस्थितिक संवेदनशीलता और सार्थक संरक्षण प्रयासों के माध्यम से ही संरक्षित किया जा सकता है। पार्टी ने सभी हितधारकों से अपील की कि सिक्किम जैसे संवेदनशील हिमालयी राज्य में हर विकास निर्णय के केंद्र में पारिस्थितिक संतुलन और सतत विकास को रखा जाए।

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