पर्यावरण संरक्षण सिक्किम के विकास मॉडल का प्रमुख आधार : प्रेम सिंह तमांग

सिक्किम ने राष्ट्रीय मंच पर रखा विकास और कनेक्टिविटी का एजेंडा

गंगटोक : सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में भाग लिया। “विकसित भारत 2047 के लिए मानव पूंजी” विषय पर आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री तमांग ने सिक्किम की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की विकास आवश्यकताओं को प्रमुखता से रखा।

बैठक की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत के सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए इसे उनके दूरदर्शी नेतृत्व, अथक परिश्रम और राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का परिणाम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में राष्ट्रपति की उपस्थिति में सिक्किम को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में सिक्किम देश के शीर्ष दस राज्यों में शामिल है तथा स्वास्थ्य एवं बाल कल्याण के कई मानकों पर राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सिक्किम के विकास मॉडल का प्रमुख आधार है। राज्य में 47 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र है तथा देश के सबसे अधिक संरक्षित वन्यजीव क्षेत्रों में से एक सिक्किम में स्थित है। उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल लर्निंग के क्षेत्र में राज्य सरकार की विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए ग्रीन स्कूल्स, मेरो रुख मेरो सन्तति, शिशु समृद्धि योजना, माया मिशन और बहिनी योजना जैसी परियोजनाओं की जानकारी दी। साथ ही विद्यालयों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के विस्तार और गंगटोक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना का भी उल्लेख किया।

वहीं, युवा सशक्तिकरण के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में छह खेलो इंडिया केंद्र और एक राज्य उत्कृष्टता केंद्र खेल प्रतिभाओं को निखारने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने ‘एक परिवार, एक उद्यमी’ विजन के तहत संचालित सिक्किम इंस्पायर्स और सीएम एलिवेट जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन पहलों से युवाओं, स्टार्टअप्स और एमएसएमई को नई संभावनाएं मिल रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन उपलब्धियों के बावजूद कनेक्टिविटी आज भी सिक्किम की सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सडक़, रेल, हवाई और डिजिटल संपर्क व्यवस्था को मजबूत करना केवल आर्थिक विकास ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि सिक्किम एक सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती पर्वतीय राज्य है। उन्होंने केंद्र सरकार से हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष मानव पूंजी सहायता ढांचा तैयार करने, दूरदराज क्षेत्रों में भारतनेट 3.0 को प्राथमिकता देने, एआई आधारित शिक्षा, टेलीमेडिसिन और डिजिटल कौशल विकास को बढ़ावा देने, पर्यटन एवं वेलनेस आधारित कौशल विकास कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करने तथा पर्वतीय राज्यों के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं में अधिक लचीलापन प्रदान करने का अनुरोध किया।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 के बाद भी नॉर्थ ईस्ट इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी (एनईआईआईपीपी) को जारी रखने की मांग करते हुए कहा कि यह नीति पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैठक के अंत में मुख्यमंत्री ने विकसित भारत@2047 के लक्ष्य के प्रति सिक्किम की प्रतिबद्धता दोहराते हुए विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र सरकार, नीति आयोग और राज्यों के बीच निरंतर सहयोग से एक स्वस्थ, शिक्षित, कुशल और सशक्त भारत का निर्माण संभव होगा।

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