सोरेंग में एआई फॉर गवर्नेंस प्रशिक्षण का सफल समापन

एआई तकनीक से परिचित हुए अधिकारी और विद्यार्थी

सोरेंग : सोरेंग के रुर्बन कॉम्प्लेक्स में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर गवर्नेंस : सिक्किम्स डिजिटल फ्यूचर’ का गुरुवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रतिभागियों को एआई आधारित विभिन्न उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग तथा प्रशासनिक कार्यों एवं जनसेवा वितरण में उनकी उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

मुख्य संसाधन व्यक्ति एवं मुख्य सचिव के स्टाफ अधिकारी सनी खरेल ने विभिन्न इंटरैक्टिव सत्रों और लाइव प्रदर्शनों के माध्यम से प्रतिभागियों को एआई की मदद से आधिकारिक पत्राचार तैयार करने, दस्तावेजों का सारांश बनाने, रिपोर्ट एवं प्रस्तुतीकरण तैयार करने, डेटा विश्लेषण करने, वेबसाइट एवं चैटबॉट विकसित करने तथा दैनिक कार्यालयी कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने के तरीकों से अवगत कराया। प्रशिक्षण के दौरान प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग पर विशेष जोर दिया गया।

प्रतिभागियों को बताया गया कि सही और सटीक प्रॉम्प्ट तैयार कर एआई से अधिक गुणवत्तापूर्ण, सटीक और प्रासंगिक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण आरएजी तकनीक का प्रदर्शन रहा। इस उन्नत एआई प्रणाली के माध्यम से भाषा मॉडल को वास्तविक समय की सूचनाओं से जोड़कर अधिक विश्वसनीय, संदर्भानुकूल और तथ्यात्मक उत्तर प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई गई। साथ ही सिस्टम प्रॉम्प्ट की अवधारणा पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

प्रतिभागियों को एआई के व्यावहारिक उपयोग और तैनाती से संबंधित तकनीकी पहलुओं, जैसे एपीआई-की निर्माण एवं एकीकरण की जानकारी भी दी गई। ग्रोक प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाइव प्रदर्शन कर यह दिखाया गया कि वास्तविक जीवन के अनुप्रयोगों में एआई मॉडल का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग कैसे किया जा सकता है। प्रशिक्षण में ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन तकनीक की क्षमताओं का भी प्रदर्शन किया गया। इसके माध्यम से मुद्रित एवं स्कैन किए गए दस्तावेजों को संपादन योग्य और खोज योग्य डिजिटल प्रारूप में परिवर्तित करने की प्रक्रिया समझाई गई। प्रशासनिक अभिलेखों के डिजिटलीकरण, दस्तावेज प्रबंधन को मजबूत बनाने तथा कागजरहित शासन व्यवस्था को बढ़ावा देने में ओसीआर की भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

कार्यक्रम में भारत की डिजिटल परिवर्तन यात्रा पर भी चर्चा की गई। प्रतिभागियों को डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के विकास, उसकी उपलब्धियों तथा पारदर्शी, सुलभ और तकनीक-संचालित शासन प्रणाली के निर्माण में उसकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही इंडिया एआई मिशन की परिकल्पना, उसके प्रमुख स्तंभों और शासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि एवं आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में एआई के उपयोग की संभावनाओं से भी अवगत कराया गया।

इसके अलावा डीपीडीपी अधिनियम, 2023 पर विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, नागरिकों के अधिकारों, डेटा प्रबंधन संस्थाओं की जिम्मेदारियों तथा डेटा सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों और दंडात्मक व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। सनी खरेल ने सॉवरेन एआई की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए देश में स्वदेशी एआई क्षमताओं और डिजिटल अवसंरचना के विकास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सरवम एआई का उदाहरण देते हुए कहा कि एआई तेजी से एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में उभर रही है, जो नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ सुशासन को भी मजबूत बना रही है।

समापन अवसर पर डीसी धीरज सुबेदी ने संसाधन व्यक्ति सनी खरेल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान एवं कौशल प्राप्त हुआ है, जिससे उनके दैनिक कार्यों की दक्षता और प्रभावशीलता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर भविष्य में उन्नत एवं प्रमाणन आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं, ताकि प्रशासनिक तंत्र की डिजिटल क्षमता को और मजबूत किया जा सके। कार्यक्रम का समापन संवादात्मक सत्रों एवं व्यावहारिक अभ्यासों के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों को यह समझाया गया कि एआई केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं, बल्कि सुशासन, उत्पादकता वृद्धि और साक्ष्य-आधारित निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है।

कार्यक्रम में एडीसी डीआर बिष्ट, एसडीएम साकछुम लेप्चा, अतिरिक्त निदेशक (पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा) डॉ. किशोर थापा, कार्यपालक अभियंता नयन बराइली, सीएओ विष्णु शर्मा, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी विष्णु शर्मा, जिला योजना अधिकारी कुमार सुब्बा, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा च्‍याखुंग साइंस कॉलेज के विद्यार्थी उपस्थित थे।

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