गंगटोक : सिक्किम की प्रसिद्ध रंगकर्मी टीला रूपा सापकोटा को रंगमंच के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। यह सम्मान संगीत नाटक अकादमी द्वारा युवा कलाकारों को कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए प्रदान किया जाता है।
गंगटोक में जन्मी और पली-बढ़ी टीला रूपा सापकोटा ने वर्ष 2011 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी), सिक्किम से थिएटर आर्ट्स में एक वर्षीय आवासीय प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम पूरा किया था। पिछले 15 वर्षों में उन्होंने अभिनेता, कलाकार और थिएटर निर्माता के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने एक दशक से अधिक समय तक एनएसडी सिक्किम रिपर्टरी कंपनी में रिपर्टरी कलाकार के रूप में कार्य किया। इसके बाद उन्होंने दुबई में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित ब्रॉडवे शैली के संगीत नाटक ‘जान-ए-जिगर’ में मुख्य कलाकार के रूप में दो वर्षों तक प्रदर्शन किया। इसके अलावा उन्होंने सिक्किम रिपर्टरी तथा छात्र रंगमंच समूहों के कई नाट्य प्रस्तुतियों में सहायक निर्देशक की भूमिका भी निभाई।
अपने करियर में सापकोटा ने शास्त्रीय, समकालीन और संगीत रंगमंच में व्यापक कार्य किया है। उन्होंने ब्लैक ऑर्किड, चेरी ऑर्चर्ड, अंधा युग, आधे-अधूरे, पगला घोड़ा, माया मेघ, सूरजमुखी और हैमलेट, उत्तररामचरित, शंकर, देहरी तथा बलिदान सहित 25 से अधिक नाटकों में अभिनय किया है। उन्होंने प्रसिद्ध थिएटर निर्देशकों रघुबीर यादव, त्रिपुरारी शर्मा, अजय मलकानी समेत भारतीय रंगमंच की कई प्रतिष्ठित हस्तियों के साथ काम किया है। वर्तमान में वह एक स्वतंत्र रंगकर्मी के रूप में सक्रिय हैं और सिक्किम में रंगमंच के विकास के साथ-साथ युवा कलाकारों के मार्गदर्शन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
इस पुरस्कार के लिए चयनित होने पर खुशी व्यक्त करते हुए सापकोटा ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत विनम्र और गौरवपूर्ण क्षण है। उन्होंने कहा, यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि मेरे शिक्षकों, साथी कलाकारों और उन सभी रंग प्रेमियों का है जो मेरी इस यात्रा का हिस्सा रहे हैं। रंगमंच ने मुझे संवेदनशीलता, अनुशासन और कहानी कहने की शक्ति सिखाई है। मैं आगे भी ऐसे सार्थक मंचन करती रहूंगी जो समाज में संवाद और चिंतन को प्रेरित करें।
उल्लेखनीय है कि उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार भारत के सबसे प्रतिष्ठित कला सम्मानों में से एक है, जो संगीत, नृत्य और रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले युवा कलाकारों को प्रदान किया जाता है। यह सम्मान देशभर के उभरते कलाकारों की प्रतिभा और समर्पण को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
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