गंगटोक : सिक्किम में गर्भवती महिला श्वेता कार्की और उनके गर्भ में पल रहे जुड़वां शिशुओं की मौत के मामले ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना को लेकर Citizen Action Party (सीएपी) सिक्किम की महिला परिषद ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है।
पार्टी की महिला परिषद अध्यक्ष बीना शर्मा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 14 वर्षों तक मातृत्व का इंतजार करने के बाद स्वेता कार्की के जीवन में खुशियां आने वाली थीं, लेकिन जुड़वां शिशुओं की गर्भ में ही मौत हो गई और उपचार के दौरान स्वयं स्वेता कार्की ने भी दम तोड़ दिया। पार्टी ने इस घटना को अत्यंत दुखद, हृदयविदारक और पूरे समाज को झकझोर देने वाला बताया है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह केवल एक परिवार का निजी शोक नहीं, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली की गंभीर विफलता का उदाहरण है। पार्टी ने कहा कि इस दर्द को समाज केवल महसूस कर सकता है, लेकिन स्वेता कार्की के पति स्वरूप छेत्री और उनका परिवार इसे प्रत्यक्ष रूप से झेल रहा है।
सीएपी-सिक्किम ने आरोप लगाया कि सिक्किम में यह पहला मामला नहीं है, जब स्वास्थ्य सेवाओं में कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठे हों। विज्ञप्ति में वर्ष 2022 में हुई ओंगमित लेप्चा की मौत का भी उल्लेख किया गया, जिनकी अपने नवजात शिशु के साथ मृत्यु हो गई थी। उस समय सरकार द्वारा जांच समिति गठित कर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक न तो पीड़ित परिवार को कोई जानकारी मिली और न ही जनता के सामने कोई रिपोर्ट आई।
इसी प्रकार जर्नादेवी राई मामले का भी उल्लेख करते हुए पार्टी ने कहा कि उनका शव बेहद खराब स्थिति में परिवार को सौंपा गया था, जिसे सिक्किम की जनता आज तक नहीं भूली है। पार्टी ने आरोप लगाया कि उस मामले में भी परिवार को न्याय नहीं मिला। प्रेस विज्ञप्ति में सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा गया कि हर बड़ी घटना के बाद जांच समिति का गठन कर केवल जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम किया जाता है। पार्टी ने सवाल उठाया कि अब तक गठित कितनी समितियों ने वास्तव में पीड़ितों को न्याय दिलाया है।
महिला परिषद ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में एक मां को ऐसी पीड़ा से गुजरना पड़ना शर्मनाक है। खासकर मातृ दिवस के अवसर पर ऐसी दुखद घटना सामने आने से पूरे समाज की संवेदनाएं और अधिक आहत हुई हैं। पार्टी ने स्वास्थ्य सेवा को केवल उपचार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और मानवता का विषय बताते हुए कहा कि जब इन मूल्यों में कमी आती है, तो उसकी कीमत निर्दोष मां और बच्चों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।
विज्ञप्ति में राज्य सरकार पर अप्रत्यक्ष हमला करते हुए कहा गया कि एक ओर राज्य के मुख्यमंत्री सिलिगुड़ी में एक निजी अस्पताल का उद्घाटन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अपने ही राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पार्टी ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग पर सत्तारूढ़ दल के “गरीब जनकल्याण प्रकोष्ठ” का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।
सीएपी-सिक्किम ने कहा कि पहले लापरवाही और अनदेखी होती है, फिर हादसे के बाद जांच समितियां बना दी जाती हैं, लेकिन न तो उनसे कोई ठोस परिणाम निकलता है और न ही पीड़ित परिवारों को न्याय मिल पाता है। पार्टी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वर्तमान मामले में गठित समिति निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में विफल रहती है, तो सीएपी-सिक्किम शोकाकुल परिवार के समर्थन में मजबूती से संघर्ष करेगी।
अंत में पार्टी ने दिवंगत श्वेता कार्की और गर्भ में मृत जुड़वां शिशुओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
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