नामची : महिला, बाल, वरिष्ठ नागरिक एवं दिव्यांग कल्याण विभाग, नामची (जोन-2) द्वारा आज लोअर फालिडारा आईसीडीएस केंद्र में 8वें पोषण पखवाड़ा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष पखवाड़ा का थीम स्क्रीन टाइम को कम करने में अभिभावकों और समुदाय की भूमिका रखा गया है।
कार्यक्रम में नामची के सीडीपीओ लक्ष्मण तमांग, एडी (पोषण) सुश्री सोफिया लेप्चा, जिला समन्वयक प्रणय शर्मा, आशा कार्यकर्ता श्रीमती प्रिसिला शेरपा, पर्यवेक्षक सुश्री संचमाया तमांग एवं समाज कल्याण निरीक्षक सुश्री रश्मि राई सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। सीडीपीओ लक्ष्मण तमांग ने बताया कि पोषण पखवाड़ा 9 से 23 अप्रैल तक चलने वाला 15 दिवसीय जागरूकता अभियान है, जिसका उद्देश्य बच्चों के समग्र विकास, पोषण और बेहतर पालन-पोषण की जानकारी देना है।
उन्होंने कहा कि यह पहल अभिभावकों और समुदाय को बच्चों के लिए स्वस्थ और जिम्मेदार वातावरण बनाने के लिए प्रेरित करती है। कार्यक्रम में दैनिक जीवन में सब्जियों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने बताया कि सब्जियां न केवल पोषण का मुख्य स्रोत हैं, बल्कि प्राकृतिक औषधि की तरह कार्य कर शरीर को विभिन्न बीमारियों से बचाती हैं। कार्यक्रम पांच प्रमुख विषयों पर आधारित रहा, जिसमें मातृ एवं शिशु पोषण के तहत 0-3 वर्ष के बच्चों के मस्तिष्क विकास हेतु प्रारंभिक उत्तेजना, 3-6 वर्ष के बच्चों के लिए खेल आधारित शिक्षा, अभिभावकों की भूमिका, स्क्रीन टाइम कम करने में संवाद का महत्व पर जोर आदि प्रमुख हैं।
सीडीपीओ ने जंक फूड को धीमा जहर बताते हुए इसके दुष्प्रभावों से आगाह किया। उन्होंने हरी सब्जियों के सेवन और संतुलित आहार बनाए रखने पर बल दिया। साथ ही आयोडीन युक्त नमक को धूप और नमी से दूर, बंद डिब्बे में रखने की सलाह दी, ताकि उसका पोषण मूल्य बना रहे। जिला समन्वयक प्रणय शर्मा ने बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मोबाइल, टीवी और लैपटॉप के उपयोग पर निगरानी आवश्यक है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित शारीरिक गतिविधियों और आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अत्यधिक स्क्रीन उपयोग बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर मौन नुकसान पहुंचाता है। अभिभावकों को बच्चों की देखभाल पौधों की तरह नियमित रूप से करने की जरूरत है।
एडी (पोषण) सुश्री सोफिया लेप्चा ने कहा कि हर अभिभावक अपने बच्चे का स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य चाहता है, जिसमें उचित पोषण की अहम भूमिका है। उन्होंने जन्म के बाद पहले छह माह तक केवल स्तनपान कराने की सलाह दी और नवजात को शहद या घी देने से बचने को कहा। छह माह के बाद पूरक आहार शुरू करने की सलाह देते हुए उन्होंने बताया कि खिचड़ी जैसे भोजन को नरम और सुपाच्य बनाकर देना चाहिए। बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए अंडा, दाल, मांस जैसे प्रोटीन युक्त आहार तथा अखरोट व एवोकाडो जैसे स्वस्थ वसा का सेवन जरूरी है। सूक्ष्म पोषक तत्वों पर भी जोर दिया गया, जिसके तहत एनीमिया से बचाव के लिए आयरन आवश्यक, आयोडीन की कमी पूरा करने के लिए आयोडीन युक्त नमक का उपयोग जरूरी है। वहीं मस्तिष्क विकास के लिए जिंक महत्वपूर्ण है, कद्दू के बीज में उपलब्ध है।
अभिभावकों को आवश्यकता पड़ने पर बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेने तथा बच्चों का नियमित वजन आईसीडीएस केंद्र में करवाने की सलाह दी गई। आशा कार्यकर्ता श्रीमती प्रिसिला शेरपा ने हाथ धोने की सही विधि का प्रदर्शन करते हुए स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पोषक आहार लेने के बावजूद स्वच्छता की कमी से बच्चे बीमार हो सकते हैं। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, एमटीओएस, गर्भवती एवं धात्री माताओं के साथ-साथ गांव के अभिभावकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
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