नामची : एक आश्यर्चजनक घटनाक्रम में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिक्किम यात्रा के दौरान ही राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को एक लंबित मामले में कोर्ट का समन प्राप्त हुआ है। चामलिंग की पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ ) ने इस पर गहरी नाराजगी जतायी है।
एसडीएफ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष कृष्णा खरेल ने एक विज्ञप्ति में कहा, आज, सिक्किम एक गहरी और परेशान करने वाली विडंबना का गवाह बना है। जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिक्किम राज्य बनने की 50वीं वर्षगांठ मनाने के लिए गंगटोक पहुंचे हैं, वहीं दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग को एक कोर्ट केस में सुनवाई के लिए तलब किया गया है। यह मामला फरवरी 2026 में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नामची बाजार से पैदल मार्च करने के आरोप में नामची पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर पर आधारित है।
खरेल के मुताबिक, यह कितनी बड़ी विडंबना है कि जिस व्यक्ति ने सिक्किम राज्य बनने के 50 वर्षों में से 25 वर्षों तक राज्य की प्रगति की बागडोर संभाली, उसी व्यक्ति को, ठीक उस समय कोर्ट में तलब किया गया है, जब पूरा राज्य अपनी 50वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा है। उनके कार्यकाल में राज्य ने वह प्रगति हासिल की जिसने भारत को पहला शत-प्रतिशत जैविक राज्य, पहला ‘निर्मल राज्य’ (स्वच्छ राज्य) और देश के सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में से एक बनाने के साथ ही कई अन्य उपलब्धियां शामिल हैं।
एसडीएफ नेता ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया जा रहा है, वे एक दिन में बनकर तैयार नहीं हुई हैं। ये परियोजनाएं एसडीएफ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग के नेतृत्व में दशकों की योजना, दूरदृष्टि और स्थिर शासन का ही परिणाम हैं। जहां एक ओर, सिक्किम की मौजूदा सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा सरकार, सिक्किम विश्वविद्यालय परिसर, विभिन्न जिला अस्पतालों और कनेक्टिविटी के लिए बने बड़े पुलों के उद्घाटन का श्रेय लेने की तैयारी में जुटी है; वहीं दूसरी ओर, जिस नेता ने इन सभी ऐतिहासिक उपलब्धियों की परिकल्पना की थी और इन्हें साकार किया था, उसी नेता को ठीक उसी दिन कोर्ट में तलब कर लिया गया है, जिस दिन प्रधानमंत्री का सिक्किम दौरा हो रहा है।
खरेल ने कहा कि जिस नेता ने सिक्किम को एक आधुनिक पहचान दिलाने के लिए अपने जीवन के 25 वर्ष समर्पित कर दिए, आज उसी नेता को कुछ आरोपों के चलते अपना पूरा दिन कोर्ट-कचहरी में बिताना पड़ा है। उनके अनुसार, जान-बूझकर इन आरोपों की सुनवाई का समय भी ठीक उसी समय तय किया गया है, जब राष्ट्रीय स्तर का यह भव्य समारोह आयोजित हो रहा है।
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