नामची : महिला, बाल, वरिष्ठजन एवं दिव्यांग कल्याण विभाग के नामची जोन-1 द्वारा आज सुनामगांव आईसीडीएस केंद्र में 8वां पोषण पखवाड़ा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सिंघिथांग जिला पंचायत सदस्य बिनिता गुरुंग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
“जीवन के पहले छह वर्षों में अधिकतम मस्तिष्क विकास और जीवन के पहले 1000 दिनों का महत्व” विषयक इस कार्यक्रम में विनीता गुरुंग ने माताओं को अपने बच्चों के मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करते हुए जोर दिया कि बच्चे ही राज्य का भविष्य हैं। उन्होंने बच्चों के आहार में पौष्टिक भोजन शामिल करने को महत्वपूर्ण बताते हुए कोदो बाजरा और बकव्हीट (कुट्टू) जैसी फसलों को उगाने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला, जिन्हें भविष्य में छोटे पैमाने के व्यवसायों के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। उन्होंने समुदाय से आग्रह किया कि वे समग्र विकास के लिए अपने स्थानीय परिवेश का समर्थन करें और उसे बेहतर बनाने में मदद करें।
साथ ही, गुरुंग ने उपस्थित लोगों से आईसीडीएस केंद्रों और सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के प्रयासों का सक्रिय रूप से समर्थन करने का भी आग्रह किया। वहीं, नामची एनआरपी एवं सीडीपीओ लक्ष्मण तमांग ने बताया कि पूरे देश में 9 से 23 अप्रैल तक मनाया जाने वाला पोषण पखवाड़ा पहल का मुख्य उद्देश्य पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने पोषण पखवाड़ा के पांच मुख्य विषयों- मां एवं बच्चे का पोषण, मस्तिष्क विकास के लिए शुरुआती प्रोत्साहन, शुरुआती वर्षों में खेल-आधारित शिक्षा, स्क्रीन टाइम कम करने में माता-पिता एवं समुदाय की भूमिका और मजबूत आंगनबॉडिय़ों के लिए समुदाय का सहयोग जुटाना- पर विस्तार से बात की।
वहीं, नामची की सहायक पोषण निदेशक सोफिया लेप्चा ने संतुलित आहार और सही पोषण के महत्व पर जोर देते हुए पहले छह महीनों तक सिर्फ मां का दूध पिलाने के बारे में कहा। उन्होंने बताया कि माँ का दूध एंटीबॉडीज का एक प्राकृतिक स्रोत होता है, जो शिशुओं को संक्रमण से बचाने में मदद करता है; साथ ही यह स्वस्थ विकास और बढ़ोतरी के लिए ज़रूरी सभी कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन, खनिज और वसा भी प्रदान करता है।
साथ ही, लेप्चा ने आवश्यक पोषक तत्वों पर प्रकाश डालते हुए विकास निगरानी के विषय पर इस बात पर जोर दिया कि बच्चे के विकास के बारे में केवल अनुमान लगाने से बचना चाहिए और उसकी नियमित मासिक जांच की जानी चाहिए। उनके साथ, नामची-1 जोन पर्यवेक्षक बिधान राई ने भी पोषण पखवाड़ा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिनों के अत्यंत महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बच्चे के पालन-पोषण की जिम्मेदारी माता-पिता दोनों को समान रूप से निभानी चाहिए। वहीं, उन्होंने आईसीडीएस केंद्रों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा कार्यकर्ताओं के समन्वित प्रयासों की भी सराहना की।
कार्यक्रम में शिक्षा विभाग की प्रतिनिधि शिक्षिका और बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता पूरन तमांग ने भी वक्तव्य रखा। इस दौरान, स्वस्थ खान-पान की आदतों को बढ़ावा देने के लिए पौष्टिक व्यंजनों का एक प्रदर्शन भी आयोजित किया गया। इसमें संतुलित आहार के महत्व पर प्रकाश डाला गया और स्वास्थ्यवर्धक भोजन तैयार करने के सरल तरीकों को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम में जिला पोषण अभियान समन्वयक प्रणय शर्मा, कल्याण निरीक्षक रोशनी राई, शिक्षा विभाग के प्रतिनिधि शिक्षक और अन्य भी उपस्थित थीं।
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