सोरेंग : महिला व बाल संरक्षण, कानूनी अधिकार और सामुदायिक जिम्मेदारी को लेकर जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा नॉर्थ ईस्ट सपोर्ट सेंटर एंड हेल्पलाइन (एनईएससीएच) के सहयोग से हाथीढुंगा सेकेंडरी स्कूल में एक जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें जिला बाल संरक्षण इकाई अधिकारी, कानूनी विशेषज्ञ और स्वास्थ्य पेशेवर के साथ दिल्ली की ‘आवाजें फाउंडेशन’ की कार्यकारी निदेशक मृदु कमल, नागालैंड इकाई के अधिवक्ता व कानूनी सलाहकार के. अर्खा और दिल्ली इकाई के कानूनी सलाहकार सैमुअल एल खोबुंग ने भी भाग लिया।
इस अवसर पर सिक्किम उच्च न्यायालय की अधिवक्ता और एनईएससीएच सिक्किम इकाई की कानूनी सलाहकार मन माया सुब्बा ने पोक्सो मामलों से जुड़े कानूनी ढांचे और बाल विवाह की रोकथाम तथा सूचना में स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। वहीं, डीसीपीओ पीटर राई ने ‘मिशन वात्सल्य योजना’ और जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जिले में पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों और बच्चों से जुड़े अन्य मामलों का भी एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।
इससे पहले, कार्यक्रम की शुरुआत में संरक्षण अधिकारी प्रेरणा सुब्बा ने अपने स्वागत भाषण में समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं, हाथीढुंगा सीनियर सेकेंडरी स्कूल के स्नातक शिक्षक एनटी लेप्चा ने कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए जमीनी स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस दौरान, सर्वोच्च न्यायालय की वकील और एनईएससीएच, नई दिल्ली की महासचिव डॉ. अलाना गोलमेई ने महिलाओं के कानूनी अधिकारों को समझने पर अपने एक उपयोगी सत्र में समुदायों के बीच कानूनी साक्षरता के महत्व पर जोर दिया। उनके साथ, रिंचेनपोंग पीएचसी की चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रिया डोल्मा तमांग ने स्कूली बच्चों में किशोरावस्था के स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डाला और इसमें शीघ्र हस्तक्षेप तथा शिक्षा की भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम में डीसीपीयू टीम ने “कोमल” नामक एक लघु फिल्म भी दिखाई जो यह चाइल्ड हेल्पलाइन सेवाओं पर आधारित एक ऑडियो-विज़ुअल प्रस्तुति थी।
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