गंगटोक : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की अर्थव्यवस्था और कुशल सार्वजनिक प्रशासन के हित में अनुशासित एवं जिम्मेदार शासन पद्धतियों को अपनाने की अपील के बाद सिक्किम सरकार ने आज से पूरे राज्य में औपचारिक रूप से मितव्ययिता के उपाय शुरू कर दिए हैं।
इसी संकल्प के तहत, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग (गोले) ने आज एक आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अपने आधिकारिक आवास मिंतोकगांग से मनन केंद्र तक लगभग 14 मिनट पैदल चलकर गए। इससे पहले, मुख्यमंत्री 15 मई को मनन केंद्र में आयोजित सिक्किम कलाकार भरोसा सम्मेलन में भी पैदल ही गए और वापस भी आए। इस दौरान, उन्होंने रास्ते में आम लोगों से बातचीत भी की।
मुख्यमंत्री के प्रेस सचिव युगन तमांग ने एक बयान में मुख्यमंत्री के इस कदम को सिक्किम की जनता के लिए एक मजबूत और प्रेरणादायक संदेश बताते हुए कहा कि नेतृत्व की शुरुआत व्यक्तिगत अनुशासन और कर्म से होनी चाहिए। ऐसे समय में जब पूरा देश मिलकर आर्थिक प्राथमिकताओं और संसाधनों के संरक्षण की दिशा में काम कर रहा है, मुख्यमंत्री का का यह निर्णय, मितव्ययिता के उपायों को केवल कागजों पर ही नहीं, बल्कि व्यवहार में भी लागू करने के प्रति सरकार की ईमानदारी को दर्शाता है।
तमांग ने बताया कि राष्ट्रीय अपील के पालन और राष्ट्रीय सेवा तथा जवाबदेही के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाते हुए विभिन्न सरकारी विभागों, स्वायत्त निकायों, सार्वजनिक उपक्रमों और अन्य सरकारी संस्थानों में संपत्तियों के कुशल उपयोग तथा ईंधन खपत को नियंत्रित करने के लिए कई निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में, विगत 14 मई को ही गृह विभाग द्वारा अधिसूचना प्रकाशित कर दी गई थी।
उनके अनुसार, इस दिशा में उठाए गए सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है मुख्यमंत्री के वाहनों के काफिले में 50 प्रतिशत की कटौती करना। इसके अतिरिक्त, सरकारी और निजी वाहनों के लिए ऑड-ईवन नियम भी लागू किए जाएंगे, जिसमें केवल टैक्सियों और आपातकालीन सेवाओं को ही छूट दी जाएगी।
प्रेस सचिव ने बताया कि सरकारी अधिकारियों और लोक सेवकों को भी सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम उपयोग करने, अनावश्यक रूप से वाहनों का इस्तेमाल कम करने और बैठकों तथा समन्वय के लिए ऑनलाइन माध्यमों व डिजिटल तकनीकों पर अधिक निर्भर रहने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। अधिकारियों को यह भी सलाह दी गई है कि जहां भी संभव हो, वे आस-पास होने वाली बैठकों और आधिकारिक कार्यों के लिए पैदल ही यात्रा करें।
इन उपायों का उद्देश्य सार्वजनिक संसाधनों का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित करते हुए जिम्मेदारी, कार्यकुशलता और अनुशासित शासन की संस्कृति को बढ़ावा देना है। इससे भी ज़्यादा ज़रूरी बात यह है कि ये कदम सरकार के इस विश्वास को दर्शाते हैं कि खर्च में कटौती सिर्फ घोषणाओं तक ही सीमित नहीं रह सकती, बल्कि यह हमारे आचरण और सामूहिक भागीदारी में भी दिखाई देनी चाहिए।
तमांग ने कहा कि मुख्यमंत्री का आज का कदम एक साफ और ज़ोरदार संदेश देता है कि प्रधानमंत्री द्वारा सुझाए गए मितव्ययिता के उपाय महज़ औपचारिकताएं नहीं हैं, बल्कि ये एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल हैं जिसके लिए हर नागरिक के सहयोग और प्रतिबद्धता की ज़रूरत है। सिक्किम सरकार ईमानदारी, जवाबदेही और कार्य-उन्मुख शासन के साथ नेतृत्व करने के अपने संकल्प पर अडिग है, और साथ ही राज्य के लोगों से अपील करती है कि वे एक मजबूत, आर्थिक रूप से अधिक जिम्मेदार और टिकाऊ राष्ट्र के निर्माण की दिशा में किए जा रहे इस सामूहिक प्रयास में सक्रिय रूप से भाग लें।
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