प्रवीण सूद का कार्यकाल एक साल बढ़ा, नए सीबीआई डायरेक्टर पर फैसला टला

नई दिल्ली । सीबीआई के नए डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर चल रही चर्चाओं और विपक्ष के विरोध के बीच केंद्र सरकार ने मौजूदा डायरेक्टर प्रवीण सूद का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया है। माना जा रहा था कि जल्द ही नए CBI प्रमुख के नाम का ऐलान हो सकता है, लेकिन अब इस फैसले पर फिलहाल विराम लग गया है।

सूत्रों के मुताबिक, हालिया बैठकों और चयन प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बाद सरकार ने फिलहाल निरंतरता बनाए रखने का फैसला किया है। प्रवीण सूद का कार्यकाल बढ़ाए जाने को एजेंसी में स्थिरता बनाए रखने और लंबित मामलों की निगरानी के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सीबीआई निदेशक चयन प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण है और वह इसमें शामिल होकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी से पीछे नहीं हट सकते। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने पत्र को साझा करते हुए लिखा, मैंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई निदेशक चयन प्रक्रिया पर अपना विरोध दर्ज कराया है। मैं एक पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया में शामिल होकर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी नहीं छोड़ सकता। नेता प्रतिपक्ष कोई रबर स्टैंप नहीं है।

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने बार-बार केंद्रीय जांच ब्यूरो का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए किया है। उन्होंने कहा कि इसी संस्थागत दुरुपयोग को रोकने के लिए चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष को शामिल किया गया था, लेकिन उन्हें प्रक्रिया में कोई सार्थक भूमिका नहीं दी गई। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने कई बार लिखित रूप से अनुरोध किया था कि चयन प्रक्रिया से जुड़े उम्मीदवारों की सेल्फ अप्रेजल रिपोर्ट और 360 डिग्री मूल्यांकन रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि समिति की बैठक के दौरान पहली बार 69 उम्मीदवारों की फाइलें उनके सामने रख दी गईं, जबकि 360 डिग्री रिपोर्ट पूरी तरह से देने से इनकार कर दिया गया।

राहुल गांधी ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने 5 मई 2025 की पिछली बैठक में भी असहमति दर्ज कराई थी। इसके अलावा 21 अक्टूबर 2025 को उन्होंने प्रधानमंत्री को निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रक्रिया के लिए कुछ सुझाव भी भेजे थे, लेकिन अब तक उनका कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि सरकार ने जरूरी जानकारी छिपाकर चयन समिति को केवल एक औपचारिकता बनाकर रख दिया है। राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि नेता प्रतिपक्ष की भूमिका केवल औपचारिक मुहर लगाने की नहीं है और इसलिए वह इस प्रक्रिया से कड़ी असहमति जताते हैं।

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