परिसीमन के खिलाफ एकजुट हुआ विपक्ष, केंद्र सरकार को घेरने के लिए एकजुट हुई पूरी विपक्षी ब्रिगेड

नई दिल्ली । कांग्रेस सहित विपक्ष के कई प्रमुख दलों ने लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने से संबंधित संवैधानिक संशोधन विधेयक को पेश किए जाने से एक दिन पहले बुधवार को कहा कि वे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के पक्ष में हैं, लेकिन इस विधेयक के परिसीमन के प्रावधानों का पुरजोर विरोध करेंगे क्योंकि ये ‘खतरनाक’ हैं।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक में नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन संबंधी विधेयक पर विस्तार से चर्चा की गई तथा ‘सर्वसम्मति से’ यह फैसला किया गया कि वे परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ एकजुट होकर वोट करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों के आधार पर वर्ष 2029 से महिला आरक्षण लागू किया जाए। बैठक में खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल और जयराम रमेश, समाजवादी पार्टी के रमाशंकर राजभर और सनातन पांडेय, द्रमुक नेता टी. आर. बालू, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला शामिल हुए।

इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (उबाठा) के संजय राउत एवं अरविंद सावंत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले, आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद संजय सिंह सहित अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने डिजिटल माध्यम से बैठक में भाग लिया।

बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष ने संवाददाताओं से कहा,हम सभी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं। हालांकि, जिस तरह से इसे लाया गया है वह संदिग्ध है और हमें इस पर गंभीर आपत्ति है। यह राजनीति से प्रेरित है। मोदी सरकार विपक्षी दलों को निशाना बनाने और दबाने के लिए इस तरह से काम कर रही है।

उनका कहना था कि हमने महिला आरक्षण विधेयक का लगातार समर्थन किया है और इस बात पर जोर दिया है कि इसे पहले पारित संशोधन के आधार पर लागू किया जाना चाहिए। खड़गे ने आरोप लगाया कि लगता है कि परिसीमन पर सरकार कुछ गलत मंशा के साथ कदम बढ़ा रही है।

उन्होंने कहा कि इसलिए सभी विपक्षी दल एकजुट होकर संसद में संघर्ष करने जा रहे हैं। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि हम महिला आरक्षण विधेयक के खिलाफ नहीं हैं। साल 2023 में अनुच्छेद 334(ए) को संविधान में शामिल किया गया था। इसमें सर्वसम्मति से महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने की बात की गई थी। हम चाहते हैं कि उस प्रावधान को तुरंत लागू किया जाए।

उनका कहना, हमारी मांग 2023 में भी यही थी कि इस प्रावधान को 2024 के लोकसभा चुनाव से ही लागू किया जाए, लेकिन सरकार ने जनगणना और परिसीमन की शर्त लगा दी थी। लेकिन अब सरकार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव प्रचार के बीच ये तीन विधेयक ला रही है। कांग्रेस महासचिव रमेश ने कहा, ये परिसीमन बड़ा खतरनाक है।

उन्होंने आगे कहा कि गृह मंत्री और सरकार के मंत्रियों ने कहा है कि लोकसभा में 50 प्रतिशत सीट बढ़ेंगी और ये समानुपातिक तौर पर सभी राज्यों के लिए लागू होगा, लेकिन ये बात इस विधेयक में शामिल नहीं है। इस विधेयक के आने से दक्षिण भारत के राज्यों, उत्तर-पश्चिमी भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों का समानुपात घटेगा। बार-बार समानुपात की बात की जा रही है, लेकिन वो परिसीमन के प्रावधानों में कहीं दिख नहीं रहा है।

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