कोलकाता । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच राजनीति में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्लामपुर की जनसभा से चुनाव आयोग और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने टीएमसी नेताओं की गाड़ियों की तलाशी के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उनके दल के नेताओं की गाड़ियों की जांच हो रही है तो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की गाड़ियों की जांच क्यों नहीं की जाती।
उन्होंने राज्यपाल पर भी हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था अब चुनाव आयोग और केंद्र के हाथ में है और उनके नियंत्रण में आने के बाद से अशांति बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यदि केंद्रीय बलों में हिम्मत है तो वे उनकी गाड़ी की रोज जांच कर सकते हैं।
ममता बनर्जी ने कहा, सिर्फ टीएमसी को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कोलकाता एयरपोर्ट पर केंद्रीय बल उनके वाहन के पास पहुंचे थे, जिस पर उन्होंने खुद जांच के लिए कहा। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा हिम्मत है तो रोज मेरी गाड़ी की तलाशी लें। मैं भाजपा की तरह चोर-डाकू नहीं हूं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री चुनाव के दौरान पैसे लेकर आ रहे हैं और केंद्रीय बलों के वाहनों के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए।
ममता ने भाजपा पर चुनाव में पैसे के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए कहा कि वे पैसों का भंडार लेकर मैदान में उतरे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार चुनाव के दौरान लोगों को प्रभावित करने के लिए योजनाओं के कार्ड बांट रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, मैं प्रधानमंत्री की कुर्सी का सम्मान करती हूं, लेकिन कुर्सी कभी झूठ नहीं बोलती।
ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण और परिसीमन को जोड़कर देश को बांटने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दोनों अलग-अलग मुद्दे हैं, लेकिन इन्हें मिलाकर पेश किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की योजनाओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना आजीवन जारी रहेगी, युवाओं को आर्थिक मदद दी जाएगी और कच्चे घरों को पक्का किया जाएगा।
तृणमूल कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर चुनाव आयोग पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है और वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पार्टी ने 14 अप्रैल की अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की ओर से पुलिस, पर्यवेक्षकों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल को निर्देश दिए गए हैं कि वे टीएमसी नेताओं और उनके परिजनों के वाहनों की विशेष रूप से जांच करें और उन्हें निशाना बनाएं।
टीएमसी ने यह भी दावा किया कि उनके पास व्हाट्सऐप संदेशों के स्क्रीनशॉट मौजूद हैं, जिनमें कथित तौर पर पुलिस और चुनाव पर्यवेक्षकों को पार्टी की चुनावी गतिविधियों और प्रचार अभियानों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। पार्टी ने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम एक ‘पूर्व-नियोजित और पक्षपातपूर्ण अभियान’ की ओर इशारा करता है। टीएमसी का आरोप है कि चुनाव आयोग और उसके अधिकारी निष्पक्ष भूमिका नहीं निभा रहे हैं और पूरी तरह प्रभावित हो चुके हैं।
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