पाकिम : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार 1 से 30 जून तक चलाए जा रहे देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत आज पाकिम जिले के अंबा मामरिंग सर्कल कार्यालय में किसान जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जिला कृषि एवं बागवानी विभाग द्वारा पाकिम एटीएमए, कृषि विज्ञान केंद्र, सीएईपीएचटी एवं सीआईपीएमसी तादोंग के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम में अंबा मामरिंग की पंचायत अध्यक्ष श्रीमती अंजलि थापा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उनके साथ, बागवानी उपनिदेशक हिस्से छेदे भूटिया, कृषि उपनिदेशक रेबेका गुरूंग, सीआईपीएमसी के सहायक निदेशक डॉ अरुणाभ चक्रवर्ती, सीएईपीएचटी, सीएयू इंफाल के सहायक प्राध्यापक डॉ घनश्याम सिंह युरेम्बम और डॉ सुषमा गुरुमयुम, सीआईपीएमसी सहायक निदेशक डॉ रोमन लेप्चा, बागवानी विकास अधिकारी सृजना गुरुंग के अलावा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्रीमती अंजलि थापा ने कृषि एवं बागवानी विभाग की पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अधिक से अधिक लाभ उठाकर कृषि उत्पादन और आजीविका को मजबूत करने का आह्वान किया। इससे पहले, कार्यक्रम की शुरुआत में बागवानी विकास अधिकारी सृजना गुरूंग ने अपने स्वागत भाषण में ‘खेत बचाओ अभियान’ के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि भूमि की सुरक्षा और उसका उत्पादक उपयोग आज के समय की बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने टिकाऊ खेती अपनाने और कृषि भूमि को सुरक्षित रखने के महत्व पर भी जोर दिया।
वहीं, तकनीकी सत्र में कृषि उपनिदेशक रेबेका गुरूंग ने ‘खेत बचाओ अभियान’ और कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बेहतर कृषि उत्पादन के लिए मृदा उर्वरता प्रबंधन, टिकाऊ कृषि पद्धतियां और कृषि भूमि का सही उपयोग बेहद जरूरी है। उन्होंने किसानों से सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने और वैज्ञानिक खेती की ओर आगे बढऩे की अपील की। उनके साथ, बागवानी उपनिदेशक हिस्से छेदे भूटिया ने बागवानी विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने वैज्ञानिक बागवानी पद्धतियों के महत्व को समझाते हुए संतरा खेती में फ्रूट फ्लाई नियंत्रण के लिए प्रोटीन बेट स्प्रे के उपयोग पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।
सीएईपीएचटी, सीएयू इंफाल के सहायक प्राध्यापक डॉ घनश्याम सिंह युरेम्बम ने संस्थान की शैक्षणिक, अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, टिकाऊ खेती और आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है। इसके अलावा, सीआईपीएमसी के सहायक निदेशक डॉ रोमन लेप्चा ने केंद्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन केंद्र की गतिविधियों और सेवाओं की जानकारी दी। उन्होंने फसल सुरक्षा के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन (आईएीएम पद्धति) को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जा सकती है और फसलों की सुरक्षा टिकाऊ तरीके से की जा सकती है। वहीं, कृषि विज्ञान केंद्र की एसएमएस एंटोमोलॉजी डॉ के स्वप्ना राई ने भी किसानों के हित में केवीके द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों और सेवाओं की जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें किसानों ने खेती की पद्धतियों, कीट प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, पशुपालन और सरकारी सहायता योजनाओं से जुड़े सवाल पूछे। विशेषज्ञों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया और उन्हें आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए।
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