चर्चित ब्रीच कैंडी क्लब पर विवाद गहराया

देश के संविधान से ऊपर नहीं हो सकता किसी क्लब का नियम : शशि थरूर

नई दिल्ली । देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का चर्चित ‘ब्रीच कैंडी क्लब’ के नियमों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। अब कांग्रेस के दिग्गज नेता शशि थरूर ने कहा है कि सरकारी जमीन पर बने इस ब्रीच कैंडी क्लब के नस्लीय प्रावधान को बनाए रखने की जरूरत नहीं है। दक्षिण मुंबई के पॉश इलाके में मौजूद औपनिवेशिक दौर का ब्रीच कैंडी क्लब में फैसले लेने का अधिकार यूरोपियन सदस्यों के पास है। भले ही भारतीयों को इस क्लब की सदस्यता मिल जाती है, मगर इसके अधिकार विदेशी ट्रस्ट के चंद लोगों तक ही सीमित हैं। पूरे विवाद को समझते हैं।

शशि थरूर को टैग करके सोशल मीडिया एक्स पर एक यूजर विशाल भार्गव ने लिखा-ब्रीच कैंडी क्लब, वो क्लब जिसके लिए शशि थरूर भी काफी अच्छे नहीं थे। यह संभवतः भारत का सबसे नस्लवादी क्लब है। अगर आप भारतीय हैं, तो क्लब में आपके संचालन की संभावना न के बराबर है। आपको यूरोपीय या यूरोपीय मूल का होना चाहिए। फिर भी, अपने शुरुआती दिनों की तुलना में यह एक बड़ा सुधार है। मुंबई के अधिकांश क्लबों ने 1947 तक भारतीयों पर प्रतिबंध लगा रखा था। ब्रीच कैंडी क्लब भी उनमें से एक था।

इस पर सोशल मीडिया एक्स पर कर्नल रोहित देव नाम से एक यूजर ने महाराष्ट्र सीएमओ, पीएमओ इंडिया और अमित शाह को टैग करते हुए लिखा-ब्रीच कैंडी क्लब पर ध्यान दें। इसे राजनयिक छूट नहीं मिल सकती। यह भारतीय ही होना चाहिए। उन्होंने शशि थरूर से सवाल पूछ लिया-आपकी क्या राय है शशि थरूर जी?

वहीं, इस सवाल के पूछ जाने पर शशि थरूर ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा-सरकारी जमीन पर नस्लवादी नियम को बनाए रखने का कोई मतलब नहीं है। यह कहना हास्यास्पद है कि क्लब के संविधान में इसकी जरूरत है। हमारे देश के संविधान का क्या?

एक पत्रकार रहे यूजर ने कहा है कि 1947 के बाद अधिकांश क्लबों ने भारतीयों को सदस्य बनने की अनुमति दे दी। लेकिन ब्रीच कैंडी क्लब ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने भारतीयों को केवल 1960 में ही सदस्यता दी। यहां तक कि राजनयिक और राजनेता शशि थरूर को भी बचपन में इस क्लब में प्रवेश करने की कोशिश करते समय यह सबक मिला था। उनके विदेशी मेजबान ने उन्हें आमंत्रित किया था, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।

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