नई दिल्ली । कांग्रेस ने बुधवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ( सीबीएसई ) की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली में खामियों से शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसको लेकर विपक्ष लगातार पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साध रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने एक बार फिर सरकार पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मीडिया में आयी एक रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सीबीएसई ने इस साल 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली शुरू करने से पहले क्षेत्रीय कार्यालयों में महत्वाकांक्षी परियोजनाएं चलाने संबंधी अपने ही शासी निकाय के सदस्यों की राय को नजरअंदाज कर दिया था।
राज्यसभा सांसद ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि अगर उनकी बात मानी गयी होती, तो लाखों छात्रों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सकता था। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने शिक्षा मंत्री प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि दरअसल, शिक्षा मंत्रालय का अहंकार और समझदारी भरी सलाह को अनसुना करना कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह ऊपर से-खुद ‘मंत्री प्रधान’ की कार्यशैली से तय होने वाली नीति है।
कांग्रेस ने कहा कि मंत्री ने खुद एक आधिकारिक संवाददाता सम्मेलन में शिक्षा पर बनी संसदीय स्थायी समिति की राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को मजबूत करने संबंधी सिफारिशों को यह कहकर खारिज कर दिया था कि उसमें विपक्ष के सदस्य भी हैं। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राज्यों और केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों को शिक्षा नीति पर चर्चा के लिए एक मंच पर लाने वाले केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (सीएबीई) की बैठक 2019 के बाद से बुलायी ही नहीं गयी है। जबकि मोदी सरकार की अपनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में सीएबीई को मजबूत करने की बात कही गई थी, जिसे मंत्रालय ने सुविधाजनक तरीके से किनारे कर दिया।
कांग्रेस वरिष्ठ नेता ने कहा कि मंत्री प्रधान का अपने पद से चिपके रहना और प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें संरक्षण देना शर्मनाक है। मंत्री और उनका मंत्रालय पूरी तरह अक्षम, अहंकारी और छात्र हितों के प्रति असंवेदनशील साबित हो चुके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह तो उस भ्रष्टाचार की बात ही नहीं है जो मंत्री के कार्यकाल में हमारे उच्च शिक्षा तंत्र में फैल चुका है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि मंत्री प्रधान को अब तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
यह विवाद तब बढ़ गया जब 12वीं कक्षा के कुछ विद्यार्थियों ने अंकन में गड़बड़ी के आरोप लगाए तथा यह दावा किया कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन प्रतियां उनकी लिखावट से मेल नहीं खातीं। इससे ओएसएम प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं की संभावित अदला-बदली को लेकर चिंताएं पैदा हो गई हैं। सीबीएसई सूत्रों ने कहा कि बोर्ड सभी शिकायतों की सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर जांच कर रहा है।
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