गेजिंग : गेजिंग जिले के योक्सम-ताशीदिंग क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला लेथ्यांग गांव प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पहचान बनाता जा रहा है। हरियाली से आच्छादित जंगल, शांत वातावरण और मनमोहक पहाड़ी सौंदर्य से घिरा यह गांव इन दिनों एक रहस्यमयी पत्थर के कारण स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
गांव के एक ओडार (गुफानुमा स्थान) के भीतर स्थित इस विशेष पत्थर को जब किसी अन्य छोटे पत्थर से ठोका जाता है, तो उसमें से तांबे या घंटी जैसी “टिंग-टिंग” की स्पष्ट ध्वनि सुनाई देती है। इसी अनोखी विशेषता के कारण इसे रहस्यमयी और पवित्र पत्थर माना जाता है। स्थानीय लेप्चा भाषा में इस पत्थर को “सांगलाब गुरूतारदुम” कहा जाता है।
लेथ्यांग गांव मुख्य रूप से लेप्चा समुदाय बहुल क्षेत्र है। लेप्चा समाज प्रकृति, जंगल, नदी-नालों और पहाड़ों को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत सम्मान की दृष्टि से देखता है। इसी सांस्कृतिक आस्था से जुड़ा यह पत्थर वर्षों से स्थानीय लोगों द्वारा एक पवित्र धरोहर के रूप में संरक्षित किया जा रहा है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार यह कोई साधारण पत्थर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति से जुड़ा स्थल है। मान्यता है कि इसे अनावश्यक रूप से छूना या नुकसान पहुंचाना अशुभ माना जाता है।
प्राकृतिक रूप से बने इस पत्थर से धातु जैसी स्पष्ट ध्वनि निकलना अपने आप में एक आश्चर्यजनक घटना मानी जाती है। यहां पहुंचने वाले पर्यटक इस अद्भुत अनुभव से काफी उत्साहित नजर आते हैं। कुछ लोग इसे प्रकृति का अनमोल उपहार मानते हैं, तो कुछ इसे धार्मिक चमत्कार के रूप में देखते हैं।
स्थानीय जनश्रुति के अनुसार, इसी ‘टिंग-टिंग’ ध्वनि के आधार पर नजदीकी गांव का नाम “तिंग तिंग” पड़ा। कहा जाता है कि पुराने समय में जब लोग इस क्षेत्र में एकत्रित होते थे, तब पत्थर से निकलने वाली आवाज दूर-दूर तक सुनाई देती थी। धीरे-धीरे इस स्थान की पहचान ‘तिंग तिंग’ नाम से होने लगी।
वर्तमान में यह स्थल धार्मिक और पर्यटन दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। सिक्किम आने वाले देशी और विदेशी पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ ऐसे रहस्यमयी और ऐतिहासिक स्थलों को देखने में विशेष रुचि दिखा रहे हैं। लेथ्यांग गांव का यह अनोखा पत्थर भी अब पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
यहां आने वाले लोगों को ओडार, घने जंगलों का वातावरण, गांव की शांत वादियां और लेप्चा संस्कृति को करीब से देखने और महसूस करने का अवसर मिलता है। यह पत्थर विशेष रूप से राथांग छू रिवर राथांगचू नदी के किनारे स्थित है। सड़क के बिल्कुल पास होने के कारण बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचकर प्रकृति का आनंद लेते दिखाई देते हैं।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस स्थान का उचित प्रचार-प्रसार और संरक्षण किया जाए, तो भविष्य में यह क्षेत्र एक महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होमस्टे, स्थानीय कृषि उत्पादों और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीणों को आर्थिक लाभ मिलने की भी संभावना है।
गांव के युवा भी अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए पर्यटन से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्राकृतिक धरोहर के अनुरूप आधारभूत सुविधाओं और पर्यटन ढांचे का अभी पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है।
प्राकृतिक रहस्य, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम बना लेथ्यांग गांव का “सांगलाब गुरूतारदुम” पत्थर अब सिक्किम की एक विशेष धरोहर के रूप में पहचान बना रहा है। आधुनिकता की दौड़ में ऐसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण बेहद आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी अपनी विरासत और इतिहास को करीब से समझ सकें।
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