नामची : जिला स्तरीय नारकोटिक्स समन्वय (एनसीओआरडी) बैठक आज जिला प्रशासनिक केंद्र, नामची स्थित उपायुक्त कार्यालय के कक्ष में अतिरिक्त जिला कलेक्टर (मुख्यालय) सुभाष घिमिरे की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
बैठक में एनडीपीएस/साडा मामलों के अभियोजन, ड्रग हॉटस्पॉट की पहचान, जिला रोडमैप तैयार करना, नशामुक्ति केंद्रों की आवश्यकता, शैक्षणिक संस्थानों को नशामुक्त क्षेत्र बनाने, त्रैमासिक ड्रग नष्ट करने की समय-सारणी, विभागों के बीच समन्वय, जिला एंटी-नारकोटिक्स रोडमैप 2026-2029 की तैयारी, एनसीओआरडी के जिला नोडल अधिकारी की नियुक्ति, ड्रग डिस्पोजल कमेटी को सक्रिय करना तथा युवाओं को खेल गतिविधियों से जोड़ने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक को संबोधित करते हुए एडीसी (मुख्यालय) सुभाष घिमिरे ने ड्रग हॉटस्पॉट की पहचान और निगरानी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने पहले से चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में प्रभावी कार्रवाई की समीक्षा करते हुए यह भी कहा कि यदि ऐसे क्षेत्र स्थानांतरित हुए हैं तो उनकी पहचान की जाए। साथ ही उन्होंने सुनसान और अलग-थलग स्थानों की मैपिंग करने पर बल दिया, जिन्हें तस्कर अपने अड्डे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।
उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और जिले के नशामुक्ति केंद्रों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए। साथ ही नाबालिगों से जुड़े मामलों में उपचार के दौरान विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विकास तिवारी ने जिले के विभिन्न थानों में दर्ज एनडीपीएस और साडा मामलों तथा उनके अभियोजन की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक संस्थानों को नशामुक्त क्षेत्र बनाने के लिए विभाग ने वैकल्पिक बीट पेट्रोलिंग की व्यवस्था शुरू की है, जिसके तहत पुलिसकर्मी संस्थानों के प्रमुखों से मिलते हैं और विद्यार्थियों से संवाद कर नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाते हैं। इसके अलावा प्रत्येक संस्थान में शिकायत पेटियां भी स्थापित की गई हैं, जिनकी निगरानी विभाग द्वारा की जा रही है।
उन्होंने बताया कि जिले में करीब 10 ड्रग हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए हैं, जहां 24 घंटे निगरानी और पेट्रोलिंग की जा रही है। अब तक जिले में एनडीपीएस और साडा के कुल 9 मामले दर्ज हुए हैं तथा 58 नशा करने वाले व्यक्तियों को उपचार के लिए नशामुक्ति केंद्रों में भेजा गया है। उन्होंने समाज में नशे की मांग को कम करने के लिए नागरिक समाज के सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
एसडीएम (मुख्यालय) निम पिंछो भूटिया ने सुझाव दिया कि समिति को नशामुक्ति केंद्रों का निरीक्षण कर वहां दी जा रही उपचार प्रक्रिया की निगरानी करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि छोटे बच्चों और किशोरों में जागरूकता फैलाते समय ‘ड्रग उपयोग’ जैसे शब्दों के प्रयोग से बचना चाहिए, क्योंकि इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है।
बैठक में पंचायत प्रतिनिधि डीके बस्नेत, एडीसी (विकास) सुमित्रा सुब्बा, एएसपी मणि कुमार तामांग, एसीएफ टेरिटोरियल बीएस सुब्बा, डीटीओ डॉ प्रतीक रसाइली, सहायक निदेशक (शिक्षा) तिलक कुमार छेत्री, एसआई श्यामेल तमांग, आबकारी एसआई भीम प्रसाद दहाल, एएसआई (एसबी) सोनम ओंगदुप लेपचा, एमवीआई आईके छेत्री, कल्याण निरीक्षक अर्पणा कार्थक तथा श्रम निरीक्षक कृष्ण भंडारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में एनसीबी सिलीगुड़ी जोनल यूनिट के पीआई कुंगचोक नोरबू वांगदी भी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
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