नामची जिला अस्पताल ने हासिल की बड़ी उपलब्धि

राज्य में पहली बार रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन प्रक्रिया की गई पूरी

नामची : नामची जिला अस्पताल के फिजिकल मेडिसिन एवं पुनर्वास विभाग ने सिक्किम में पहली बार हाइब्रिड तकनीक के माध्यम से जेनिकुलर नर्व की रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन प्रक्रिया सफलतापूर्वक कर एक नई उपलब्धि हासिल की है।

यह अत्याधुनिक उपचार घुटनों में ऑस्टियोआर्थराइटिस के कारण होने वाले पुराने दर्द से पीड़ित मरीजों के लिए कारगर साबित हो रहा है। इस प्रक्रिया को डॉ प्रशांत रसाइली और ऑपरेशन थिएटर टीम द्वारा सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। यह एक न्यूनतम इनवेसिव (कम चीरा लगाने वाली) और गैर-सर्जिकल तकनीक है, जो उन मरीजों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो कुल घुटना प्रत्यारोपण (टोटल नी रिप्लेसमेंट) के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

हाइब्रिड रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन तकनीक में घुटने के आसपास मौजूद जेनिकुलर नसों को सटीक रूप से लक्षित कर दर्द के संकेतों को बाधित किया जाता है। इससे गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों को लंबे समय तक राहत मिलती है। सामान्य आरएफए प्रक्रिया में केवल एक्स-रे (फ्लोरोस्कोपी) के जरिए हड्डियों के आधार पर सूई की दिशा तय की जाती है, जिससे कुछ मामलों में सटीकता सीमित हो सकती है। वहीं हाइब्रिड तकनीक में दो आधुनिक तरीकों का संयोजन किया गया है, जिसमें अल्ट्रासाउंड मार्गदर्शन नसों के साथ चलने वाली धमनियों को स्पष्ट रूप से दिखाता है, जिससे चिकित्सक सुरक्षित तरीके से सूई डाल सकते हैं और रक्त वाहिकाओं को नुकसान से बचाया जा सकता है।

वहीं फ्लोरोस्कोपी पुष्टि से हड्डियों के सापेक्ष सूई की सही गहराई सुनिश्चित करता है, जिससे मोटर नसों को नुकसान का खतरा कम होता है। इस तकनीक के फायदे काफी अधिक हैं, जिसमें प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और सटीक, जटिलताओं का कम जोखिम, बिना सर्जरी दर्द से राहत, मरीजों की मोबिलिटी में सुधार, घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी को टालना शामिल है। नामची जिला अस्पताल में इस प्रक्रिया की सफलता सिक्किम में इंटरवेंशनल पेन मैनेजमेंट के क्षेत्र में बढ़ती विशेषज्ञता को दर्शाती है। यह तकनीक न केवल मरीजों को राहत प्रदान कर रही है, बल्कि भविष्य में उन्नत चिकित्सा सेवाओं के विस्तार का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है।

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