गेजिंग : गेजिंग और लिंगचोम को जोड़ने वाली मुख्य सड़क के अंतर्गत तिक्जेक भीर पर आखिरकार सुरक्षा बैरियर लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। गेजिंग जिले के यांगथांग क्षेत्र में स्थित यह स्थान लंबे समय से अत्यंत जोखिमपूर्ण माना जाता रहा है। सुरक्षा के अभाव में स्थानीय निवासियों और यात्रियों को हमेशा भय के बीच यात्रा करनी पड़ती थी। अब इस खतरे को कम करने के उद्देश्य से लगभग आधा किलोमीटर लंबे क्षेत्र में सुरक्षा बैरियर का निर्माण कार्य तेज़ी से चल रहा है।
तिक्जेक भीर प्राकृतिक रूप से बेहद खतरनाक और चुनौतीपूर्ण भू-भाग है। यहां नीचे देखने पर गहरी खाई और ऊपर देखने पर अस्थिर चट्टानों के कारण स्थिति और भी भयावह प्रतीत होती है। इतने खतरनाक स्थान पर भी कई स्थानीय परिवार पत्थर तोड़ने और गिट्टी बनाने जैसे कार्यों से अपना जीवनयापन करते हैं, जो उनके साहस और संघर्ष को दर्शाता है। इस मार्ग पर यात्रा के दौरान ऊपर से पत्थर गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्ष 1980-81 में निर्मित यह सड़क कई दुखद घटनाओं की साक्षी रही है। हाल ही में मार्च महीने के दूसरे सप्ताह में एक टाटा वाहन दुर्घटना में तीन लोगों की मृत्यु भी इसी स्थान पर हुई थी, जिसने सुरक्षा की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट कर दिया।
गौरतलब है कि वर्ष 1990 के आसपास इस क्षेत्र में दो स्थानों पर सुरक्षा बैरियर लगाए गए थे, लेकिन समय के साथ वे पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं और अब उनका कोई अस्तित्व नहीं बचा है। लंबे समय से उपेक्षित इस समस्या के समाधान के लिए गेजिंग जिला प्रशासन ने पहल की है।
डीसी तेनजिंग डी. डेन्जोपा के नेतृत्व में तथा सड़क विभाग के सहयोग से रविवार की छुट्टी के दिन भी कार्य शुरू किया गया। विभागीय अभियंता और कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर निर्माण कार्य को जल्द पूरा करने में जुटे हैं। जिलाधिकारी स्वयं भी प्रतिदिन स्थल का दौरा कर कार्य की प्रगति की निगरानी कर रहे हैं, जिससे प्रशासन की प्रतिबद्धता साफ दिखाई देती है।
इस महत्वपूर्ण पहल का स्थानीय लोगों, छात्रों, कर्मचारियों, अभिभावकों और बाजार आने-जाने वाले आम नागरिकों ने स्वागत किया है। उनका मानना है कि सुरक्षा बैरियर बनने के बाद इस मार्ग पर यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम हो जाएगी, जिससे भविष्य में दुर्घटनाओं में कमी आएगी। तिक्जेक भीर में शुरू किया गया यह कार्य केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि जनसुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है, जो विकास के साथ सुरक्षा को प्राथमिकता देने का संदेश भी देता है।
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