गंगटोक : “नवाचार, कार्य शोध और स्कूल नेतृत्व के माध्यम से कक्षाओं में बदलाव” विषय पर गंगटोक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित छठा शिक्षक सम्मेलन आज यहां संपन्न हो गया। इसका उद्देश्य शिक्षकों, स्कूल नेतृत्वों और प्रशिक्षु शिक्षकों को नेतृत्व, नवीन शिक्षण पद्धतियों और कार्य शोध जैसी चिंतनशील प्रथाओं के माध्यम से कक्षा प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने हेतु एक गतिशील मंच प्रदान करना है। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में एससीईआरटी की अतिरिक्त निदेशक श्रीमती छिरिंग ल्हामू भूटिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं। उनके साथ, गंगटोक, पाकिम और मंगन जिलों के जिला और ब्लॉक कार्यालयों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
सम्मेलन के समापन सत्र में विशेष शिक्षा सचिव ल्हाकी डोमा भूटिया मुख्य अतिथि थीं। उनके साथ ही संयुक्त निदेशक वासुदेव अधिकारी एवं आरके पांडे, संयुक्त आईटी निदेशक श्रीमती छिरिंग यांगचेन भूटिया, संयुक्त सचिव कर्मा छिरिंग लामा के अलावा गंगटोक, पाकिम तथा मंगन जिलों के शिक्षा अधिकारी और अन्य भी उपस्थित रहे।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि भूटिया ने 2018 से लगातार शिक्षक सम्मेलन आयोजित करने की प्रथा को बनाए रखने के लिए संस्थान को बधाई दी। उन्होंने डीआईईटी संकाय और शिक्षकों के सहयोगात्मक प्रयासों की सराहना करते हुए उल्लेख किया कि तकनीकी विकास में हुई भारी प्रगति कभी भी शिक्षकों की रचनात्मकता की जगह नहीं ले पाएगी। उन्होंने नवीन दृष्टिकोण अपनाने और शिक्षण पद्धतियों पर चिंतन-मनन करने के माध्यम से शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में सुधार के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया। साथ ही, उन्होंने कक्षा-शिक्षण में बदलाव लाने और एक प्रभावी स्कूली वातावरण बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास जारी रखने का आग्रह किया। कार्यक्रम के दौरान, गणमान्य व्यक्तियों ने ‘कार्य शोध संकलन 2024-25’ का विमोचन किया और 12 शिक्षक प्रस्तुतकर्ताओं को प्रमाणपत्र तथा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
इससे पहले, उद्घाटन सत्र की शुरुआत संस्थान के प्राचार्य छिरिंग वांगदी भूटिया के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में संस्थान की भूमिका के संदर्भ में सम्मेलन की पृष्ठभूमि को संक्षेप में साझा किया। इस अवसर पर एससीईआरटी की अतिरिक्त निदेशक छिरिंग ल्हामू भूटिया ने शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों से सम्मेलन में भाग लेने वाले शिक्षकों द्वारा साझा किए गए विचारों और अनुभवों को अपनी कक्षाओं में लागू करने का आग्रह किया। उन्होंने सम्मेलन में निजी स्कूलों के शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों को शामिल किए जाने की सराहना की, और इस पहल में नए आयाम जोड़ने के प्रयासों के लिए संस्थान को प्रोत्साहित किया।
सम्मेलन में तीन केंद्रित तकनीकी सत्र शामिल थे, जिनका उद्देश्य शिक्षण-अधिगम को सुदृढ़ करना, चिंतनशील प्रथाओं को बढ़ावा देना और स्कूल नेतृत्व को सशक्त बनाना था। इसके तहत, पहले शैक्षिक वार्ता एवं प्रदर्शन सत्र में विज्ञान और गणित विषयों में अपनाई जा रही नवीन शिक्षण पद्धतियों पर प्रकाश डाला गया। इन प्रस्तुतियों में ऐसे आकर्षक, गतिविधि-आधारित और अनुभव-जन्य तरीकों को दिखाया गया, जो बीच के स्तर के छात्रों के लिए सीखने की प्रक्रिया को इंटरैक्टिव और सार्थक बनाते हैं। अध्यक्ष एससीईआरटी गणित शिक्षक धीरज शर्मा और सहायक प्रोफेसर रोशनी शर्मा की अध्यक्षता में हुए इस सत्र का संचालन विनोद बस्नेत, लेक्चरर (विज्ञान) और देवराज शर्मा, लेक्चरर (गणित) ने किया।
वहीं, ‘जांच से प्रभाव तक-कक्षाओं में कार्य शोध’ नामक दूसरे सत्र की अध्यक्षता एससीईआरटी उप निदेशक ताशी डोमा अकुशला और कर्मा डोमा कालेओन ने की। इसमें कार्य शोध के माध्यम से चिंतनशील शिक्षण पर जोर दिया गया। शिक्षकों ने बताया कि वे कक्षा की चुनौतियों की पहचान कैसे करते हैं, समाधान कैसे लागू करते हैं, और सीखने के परिणामों में सुधार कैसे करते हैं, विशेष रूप से ‘बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान’ के क्षेत्र में। इस सत्र का संचालन डीआईईटी लेक्चरर डॉ तेनजिंग नोरजोम भूटिया और वरिष्ठ लेक्चरर अरुणा प्रधान ने किया।
इसके अलावा, ‘दृष्टिकोण से क्रियान्वयन तक-व्यवहार में स्कूल नेतृत्व’ नामक तीसरे सत्र में स्कूल प्रमुखों द्वारा एक पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसमें स्कूल सुधार और संस्थागत विकास के लिए नेतृत्व के अनुभवों, चुनौतियों और प्रभावी रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया। पैनल चर्चा सत्र का संचालन अंग्रेजी की सीनियर लेक्चरर दुर्गा श्रेष्ठ ने किया।
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