प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर को बताया ‘अष्टलक्ष्मी’, सिक्किम के बांस उद्योग और छुरपी की सराहना की

गंगटोक : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें एपिसोड में पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश की ‘अष्टलक्ष्मी’ बताते हुए यहां की प्रतिभा और प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की उपलब्धियों का अक्सर ‘मन की बात’ में उल्लेख होता है और इस बार उन्होंने बांस उद्योग में आए बदलाव को प्रमुखता से रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जो बांस पहले बोझ माना जाता था, वही आज रोजगार, व्यवसाय और नवाचार को नई गति दे रहा है। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश काल के कानून में बांस को पेड़ की श्रेणी में रखा गया था, जिससे इसके परिवहन पर सख्त नियम लागू थे और लोग इससे जुड़े कार्यों से दूर हो गए थे। वर्ष 2017 में कानून में संशोधन कर बांस को पेड़ों की श्रेणी से हटाया गया, जिसके बाद पूरे पूर्वोत्तर में बांस उद्योग तेजी से विकसित हुआ है।

इस परिवर्तन का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने सिक्किम के गंगटोक के पास स्थित लागास्टल बांस एंटरप्राइज टीम का उल्लेख किया। यह टीम बांस से हस्तशिल्प, अगरबत्ती, फर्नीचर और इंटीरियर सजावट की वस्तुएं तैयार करती है। लागास्टल डिजाइन स्टूडियो, जिसे लागास्टल एंटरप्राइज भी कहा जाता है, सिक्किम का एक महिला-नेतृत्व वाला प्रतिष्ठित बांस उद्योग है, जिसकी स्थापना उद्यमी और डिजाइनर चिमी ओंगमु भूटिया ने की है। यह संस्था पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों जैसे हस्तशिल्प, लाइटिंग और आधुनिक घरेलू सजावटी सामान के निर्माण में विशेषज्ञता रखती है।

प्रधानमंत्री द्वारा उल्लेख किए जाने पर चिमी ओंगमु भूटिया ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समर्थन से उद्यमिता, महिला सशक्तिकरण और सतत विकास को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की सोच ने छोटे राज्यों के लोगों को बड़े सपने देखने और नए अवसर सृजित करने के लिए प्रेरित किया है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भारत के डेयरी क्षेत्र में हो रहे बदलावों का भी जिक्र किया और पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने की बात कही। उन्होंने सिक्किम के प्रसिद्ध छुरपी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह याक के दूध से बनने वाला विशेष पनीर है, जिसका स्वाद पहाड़ों की सादगी को दर्शाता है। ‘मन की बात’ में सिक्किम के बांस नवाचार और पारंपरिक छुरपी का उल्लेख राज्य की सतत विकास और सांस्कृतिक पहचान में बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

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