गंगटोक : सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) के महासचिव (प्रेस, प्रचार एवं सोशल मीडिया) दीपेन राई ने एसपीएससी द्वारा जारी आरटीआई जवाब को गंभीर बताते हुए कहा है कि इससे एसआई भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और संभावित गड़बड़ी के संकेत मिलते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला केवल प्रक्रियात्मक अस्पष्टता का नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से जानकारी छिपाने का प्रतीत होता है, जिससे पूरी भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। 22 अप्रैल को जारी प्रेस विज्ञप्ति में एसडीएफ ने बताया कि आरटीआई संख्या 44/एसपीएससी/आरटीआई/2026 (दिनांक 08 अप्रैल 2026), जो कि बीजेपी की सिक्किम इकाई द्वारा दायर की गई थी, के जवाब में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं।
एसडीएफ का कहना है कि यह खुलासा बेहद चिंताजनक है और इससे भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं। एसपीएससी के अनुसार कुल 5,873 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से 573 अभ्यर्थी पीईटी और मुख्य परीक्षा के लिए योग्य घोषित किए गए, जबकि 355 अंतिम चरण तक पहुंचे। लेकिन आयोग ने व्यक्तिगत अंकपत्र और उत्तर पुस्तिकाएं साझा करने से इनकार कर दिया। केवल 107 अभ्यर्थियों के प्रारंभिक परीक्षा के कुल अंक और 50 अभ्यर्थियों के पीईटी एवं मुख्य परीक्षा के समेकित अंक ही जारी किए गए, वह भी कथित सहमति के आधार पर।
एसडीएफ ने इस आंशिक जानकारी को पर्दादारी करार देते हुए सवाल उठाया है कि आखिर एसपीएससी क्या छिपाना चाहता है। पार्टी का कहना है कि इस तरह की चयनात्मक जानकारी से संदेह और गहरा होता है। प्रेस विज्ञप्ति में यह भी आरोप लगाया गया है कि कई सफल अभ्यर्थी सत्तारूढ़ दल एसकेएम से जुड़े हुए हैं। एसडीएफ ने इसे भर्ती प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप का संकेत बताया है। साथ ही मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग गोले के उस कथित बयान का भी उल्लेख किया गया, जिसमें कहा गया था कि पार्टी के लिए काम करने वालों का चयन होगा।परिणाम 26 नवंबर 2025 को घोषित होने के बाद से ही अभ्यर्थियों में असंतोष है।
एसडीएफ प्रतिनिधिमंडल ने 28 नवंबर और 17 दिसंबर 2025 को एसपीएससी कार्यालय जाकर जवाब मांगने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। एसडीएफ ने सभी अभ्यर्थियों के अंकपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं सहित पूरी परीक्षा प्रक्रिया का पूर्ण खुलासा करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि आयोग न्याय नहीं करता, तो सत्ता में आने पर वह निष्पक्ष समीक्षा कर सभी अभ्यर्थियों को न्याय दिलाएगी।
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