पाकिम : स्कूली छात्रों को मत्स्य विकास, जलीय जैव विविधता के संरक्षण और सतत प्रथाओं को अपनाने के प्रति जागरूक करने हेतु जिला मत्स्य विभाग द्वारा आज असम लिंग्जे स्थित मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल में छात्रों के लिए मत्स्य जागरुकता पहल कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य फोकस मत्स्य पालन के पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व, प्रदूषण एवं असुरक्षित मछली पकड़ने की प्रथाओं से उत्पन्न खतरों और जलीय संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम में नामची जिला मत्स्य विकास अधिकारी उरगेन शेतेन भूटिया ने सिक्किम की स्थानीय मछली प्रजातियों पर अपनी एक प्रस्तुति में बताया कि राज्य में ऐसी 47 प्रजातियां पाई जाती हैं। उन्होंने इन प्रजातियों की घटती संख्या के लिए जिम्मेदार कारकों पर प्रकाश डाला, जिनमें जल प्रदूषण और हानिकारक प्रथाएं शामिल हैं, जो जलीय जीवन के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
वहीं, गंगटोक के डीएफडीओ सुरेंद्र भंडारी ने ‘रेनबो ट्राउट’ मछली प्रजाति पर एक प्रस्तुति दी, जिसमें उन्होंने इसकी सामान्य विशेषताओं, जीवनकाल, खान-पान की आदतों, प्रजनन के तरीकों और पालन-पोषण की तकनीकों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने मछली के सेवन के पोषण संबंधी मूल्यों और स्वास्थ्य लाभों पर भी विस्तृत जानकारी दी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने मत्स्य क्षेत्र में करियर के अवसरों का एक संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत में, मत्स्य अधिकारियों द्वारा ‘ग्लोफिश’ को प्रदर्शित करते हुए एक एक्वेरियम प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिससे छात्रों को सजावटी मछलियों और एक्वेरियम के प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। साथ ही, इस अवसर पर एक चित्रकला प्रतियोगिता और एक क्विज प्रतियोगिता भी शामिल रही।
इस संबंध में, मुख्यमंत्री मॉडल स्कूल के निदेशक कर्नल उज्ज्वल खतिवड़ा ने कार्यक्रम के आयोजन और विभाग के योगदान के लिए मत्स्य विभाग की सराहना की। उन्होंने यह भी बताया कि स्कूल अनुभवात्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक मछली टैंक स्थापित करने और एक मत्स्य क्लब बनाने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
कार्यक्रम में पाकिम डीएफडीओ गौरी मुखिया, गंगटोक के सहायक निदेशक (मुख्यालय) नरेश सुनार और ब्लॉक अधिकारी योगेश दंगल के साथ अन्य ने भी भाग लिया।
#anugamini
No Comments: