सोरेंग : विशेष और सामान्य शिक्षा के बीच की खाई पाटने में सहयोगी शिक्षण के महत्व पर हाल ही में सोरेंग गवर्नमेंट बीएड कॉलेज में “एक समावेशी स्कूल का निर्माण” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।
एलआईएलडी कोलकाता के अंतर्गत सीआरसी सिक्किम और सोरेंग बीएड कॉलेज द्वारा संयुक्त रुप से आयोजित इस कार्यशाला में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि कैसे सहयोगी शिक्षण पद्धतियां समावेशी कक्षा के वातावरण को बढ़ावा दे सकती हैं, जिससे अंतत: समावेशी स्कूलों और एक अधिक समावेशी समाज के विकास में योगदान मिलेगा। कार्यक्रम में जिले के मुख्य शिक्षा अधिकारी टीडी भूटिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यशाला की थीम की परिकल्पना सोरेंग बीएड कॉलेज की प्रिंसिपल श्रीमती देवी कला लामा द्वारा की गई थी, जो उद्घाटन से लेकर समापन समारोह तक, पूरे समय सक्रिय रूप से शामिल रहीं।
इस दौरान, सीआरसी सिक्किम की निदेशक और मुख्य रिसोर्स पर्सन डॉ पुष्पांजलि गुप्ता ने दस्तावेजी विश्लेषण द्वारा समर्थित ज्ञानवर्धक सत्र प्रस्तुत किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखाएं मूल रूप से समावेशी होती हैं और शिक्षार्थियों के बीच कोई भेदभाव नहीं करतीं, क्योंकि उनके दिशानिर्देश सभी छात्रों के लिए तैयार किए गए हैं।
वहीं, डीआईएसएलआई पाठ्यक्रम के मास्टर ट्रेनर (बधिर) अखिलेश चौहान और दुभाषिया विशाल विश्वकर्मा द्वारा भारतीय सांकेतिक भाषा पर विशेष सत्र द्वारा आयोजित किए गए। कार्यशाला में लगभग 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 150 छात्र-शिक्षक, सोरेंग के इंटर्नशिप स्कूलों के 20 शिक्षक और 15 सहायक प्रोफेसर शामिल थे। कार्यक्रम का समन्वय शिक्षा विभाग की सहायक प्रोफेसर सृजना सुब्बा द्वारा किया गया।
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