होर्मुज संकट से विझिंजम पोर्ट को मिला बूस्ट : शशि थरूर

डीप-वॉटर हब के तौर पर उभर रहा पोर्ट

नई दिल्ली । यूएस-ईरान युद्ध के बाद उभरे होर्मुज संकट ने दुनिया के तमाम देशों के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। यह चुनौती है समुद्री मार्ग से अंतरराष्ट्रीय व्यापार की। ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के संकट से उभरने के लिए भारत को भी वैकल्पिक रास्तों पर ध्यान देना होगा। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल के तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने कहा है कि वैश्विक शिपिंग संकट के बीच केरल का विझिंजम पोर्ट तेजी से एक अहम समुद्री हब के रूप में उभर रहा है।

एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव ने दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींचा है और इसका सीधा फायदा विझिंजम पोर्ट को मिल रहा है। थरूर के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में जारी संकट के कारण वैश्विक शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं, जिससे कंपनियां वैकल्पिक और सुरक्षित बंदरगाहों की तलाश कर रही हैं। ऐसे हालात में विझिंजम पोर्ट एक भरोसेमंद विकल्प बनकर सामने आया है, जहां जहाजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।

उन्होंने बताया कि मौजूदा स्थिति में करीब 100 जहाज इस पोर्ट पर कतार में हैं या यहां आने की तैयारी में हैं जो इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी अहमियत लगातार बढ़ रही है। यह पोर्ट भारत का पहला डीप-वॉटर ट्रांसशिपमेंट हब है, जो बड़े जहाजों को आसानी से संभाल सकता है।

इंटरव्यू में थरूर ने हाल ही में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े घटनाक्रम का भी जिक्र किया और कहा कि भारतीय जहाजों की सुरक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने माना कि इस मामले में कूटनीतिक स्तर पर बेहतर बातचीत की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके। थरूर ने यह भी कहा कि भारत इस पूरे संकट के बीच एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के तौर पर उभर सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को शांति स्थापित करने और तनाव कम करने के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, साथ ही विझिंजम पोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा उठाकर वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ानी चाहिए।

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