नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद की उस याचिका को ठुकरा दिया है जिसमें उसने फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश से जुड़े मामले में उसकी जमानत अर्जी को खारिज किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार का अनुरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली दंगों के पीछे की साजिश के सिलसिले में खालिद के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर भरोसा करने के लिए उचित आधार हैं।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने पुनर्विचार याचिका पर मौखिक सुनवाई के आग्रह वाली याचिका भी खारिज कर दी। पीठ ने 16 अप्रैल के आदेश में कहा, पुनर्विचार याचिका और उसके साथ संलग्न दस्तावेजों पर गौर करने के बाद हमें पांच जनवरी 2026 के फैसले की समीक्षा करने का कोई ठोस आधार या कारण नहीं मिला। इसी के मद्देनजर पुनर्विचार याचिका खारिज की जाती है।
सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक पुनर्विचार याचिकाओं पर आम तौर पर वे ही जज विचार करते हैं, जिन्होंने मूल फैसला पारित किया हो। इसका मकसद मूल फैसले में मौजूद किसी स्पष्ट त्रुटि या उससे हुए गंभीर अन्याय को दूर करना है और यह प्रक्रिया आमतौर पर बिना मौखिक बहस के चैंबर में ही निपटाई जाती है। हालांकि, पुनर्विचार की गुहार लगाने वाले पक्ष न्यायाधीशों से खुली अदालत में सुनवाई का अनुरोध कर सकते हैं।
शीर्ष अदालत ने पांच जनवरी को खालिद के अलावा शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि, उसने मामले के पांच अन्य आरोपियों को यह कहते हुए जमानत दे दी थी कि सभी आरोपियों की स्थिति समान नहीं है। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान दंगे भड़क उठे थे, जिनमें 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस ने दंगों की साजिश से जुड़े मामले में कुल 18 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से 11 लोगों को जमानत मिल चुकी है।
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