पश्चिम एशिया संकट पर भारत अलर्ट, राजनाथ सिंह बोले- हर स्थिति के लिए तैयार रहें

'हर चुनौती से निपटने को तैयार'

नई दिल्ली । भारत को पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति अस्थिर है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को यह बात कही। राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर रखने के लिए बनाए गए मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (आईजीओएम) की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी अचानक बढ़ रहे तनाव के लिए तैयार रहना चाहिए।

इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रसायन और उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा, उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी, विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू, जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और बिजली मंत्री मनोहर लाल शामिल हुए।

रक्षा मंत्रालय ने कहा, राजनाथ सिंह ने संघर्ष की स्थिति को ‘अनिश्चित और अस्थिर’ बताया और कहा कि भारत को न केवल तनाव कम होने बल्कि फिर से बढ़ने की स्थिति के लिए भी तैयार रहना चाहिए। सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार इस संघर्ष से पैदा होने वाले किसी भी खतरे या समस्या से निपटने के लिए तेजी और प्रभावी तरीके से काम कर रही है।

रक्षा मंत्री ने’ भारत मैरिटाइम इंश्योरेंस पूल’ बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने का भी जिक्र किया, जिसके लिए 12,980 करोड़ रुपये की सरकारी गारंटी दी गई है, ताकि समुद्री बीमा लगातार उपलब्ध रहे। मंत्रालय के अनुसार, इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि भारतीय व्यापार को अंतरराष्ट्रीय मार्गों से आने-जाने वाले जहाजों के लिए सस्ता बीमा मिलता रहे, भले ही वे अस्थिर समुद्री क्षेत्रों से गुजरें। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह फैसला भारत के आयात-निर्यात को सुरक्षित और स्थिर बनाने में मदद करेगा और व्यापार प्रणाली को और मजबूत बनाएगा।

मंत्रियों के अनौपचारिक समूह की चौथी बैठक (आईजीओएम) को बताया गया कि वैश्विक आपूर्ति में बाधा के बावजूद भारत ने ईंधन का पर्याप्त भंडार बनाए रखा है और आपूर्ति लगातार जारी रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मंत्रालय ने कहा, इस समय भारत के पास कच्चा तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ का भंडार 60 दिनों से अधिक के लिए पर्याप्त है। वहीं, एलएनजी का भंडार लगभग 50 दिन और एलपीजी का भंडार करीब 40 दिन के लिए उपलब्ध है, जिसमें घरेलू उत्पादन का भी योगदान है।

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