गंगटोक : एसडीएफ की चेली मोर्चा ने 20 अप्रैल को सिक्किम में महिलाओं के आरक्षण और प्रतिनिधित्व के क्रियान्वयन को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए शासन व्यवस्था और मौजूदा नीतियों की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एसडीएफ नेता कोमल चामलिंग ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, लेकिन इसके निष्पक्ष क्रियान्वयन और प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं।
उन्होंने बताया कि सिक्किम में पहले से ही पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण, साथ ही शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू है। इन कदमों का श्रेय उन्होंने पवन चामलिंग के नेतृत्व वाली एसडीएफ सरकार की पहल को दिया।
उन्होंने कहा, इन नीतियों के कारण महिलाएं अब विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई दे रही हैं और यह भी जोड़ा कि स्थानीय शासन में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करने वाले राज्यों में सिक्किम अग्रणी रहा है। उन्होंने एसडीएफ कार्यकाल के दौरान राज्य की पहली महिला स्पीकर और मुख्य सचिव की नियुक्ति को भी ऐतिहासिक कदम बताया।
हालांकि, कोमल चामलिंग ने आरोप लगाया कि कई कल्याणकारी योजनाओं का पारदर्शी ढंग से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है और लाभों का वितरण चयनात्मक तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ऐसी धारणा है कि सहायता राजनीतिक संबद्धता के आधार पर दी जा रही है। कल्याणकारी योजनाएं सभी तक समान रूप से पहुँचना चाहिए।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कानून पारित हो चुका है, लेकिन इसका क्रियान्वयन अभी लंबित है, क्योंकि यह नई जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछली जनगणना 2011 में हुई थी।
चामलिंग ने प्रतिनिधित्व को लेकर भी चिंता जताते हुए कहा कि सिक्किम से केवल एक ही सांसद है। उन्होंने सवाल किया, यदि प्रतिनिधित्व नहीं बढ़ेगा, तो राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की आवाज़ कैसे मजबूत होगी? साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 50 वर्षों बाद भी केंद्र में कोई कैबिनेट मंत्री नहीं रहा है। उन्होंने वर्तमान राज्य मंत्रिमंडल में महिलाओं की अनुपस्थिति को भी गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा, यदि हम महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, तो निर्णय लेने के स्तर पर उनका प्रतिनिधित्व होना जरूरी है।
एसडीएफ नेता ने जनसंख्या आधारित परिसीमन से जुड़े मुद्दों को भी उठाते हुए चेतावनी दी कि सिक्किम जैसे छोटे राज्यों को भविष्य में सीटों के आवंटन में नुकसान उठाना पड़ सकता है। कोमल चामलिंग ने जोर देकर कहा कि पार्टी सिद्धांततः महिलाओं के आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इसके उचित क्रियान्वयन और छोटे राज्यों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, महिला सशक्तिकरण वास्तविक और सार्थक होना चाहिए, केवल एक राजनीतिक नारा नहीं।
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