गंगटोक : दक्षिण सिक्किम में निर्माणाधीन एनएचपीसी तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की सुरंग में सोमवार को हुए भीषण हादसे के बाद बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान जारी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरंग के भीतर मीथेन गैस में विस्फोट के बाद भूस्खलन हो गया, जिससे सुरंग का एक हिस्सा मलबे से बंद हो गया और करीब 12 से 20 मजदूर अंदर फंस गए। हालांकि, अब तक प्रशासन ने फंसे मजदूरों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की है।
हादसा दक्षिण सिक्किम के मामरिंग स्थित समरदुंग सुरंग में हुआ, जहां पटेल इंजीनियरिंग कंपनी एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 परियोजना के तहत सुरंग निर्माण का कार्य कर रही है। बताया जा रहा है कि सुरंग के भीतर करीब 1.5 किलोमीटर अंदर मीथेन गैस जमा हो गई थी। सोमवार दोपहर गैस को बाहर निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन इसी दौरान अचानक विस्फोट हो गया। विस्फोट के कारण सुरंग के भीतर भूस्खलन हुआ और एक बड़ा हिस्सा मलबे से भर गया, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूर बाहर नहीं निकल सके।
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, कुछ मजदूर किसी तरह बाहर निकलने में सफल रहे, लेकिन कई श्रमिक अब भी सुरंग के भीतर फंसे हुए हैं। फंसे हुए मजदूरों में दक्षिण सिक्किम के समरदुंग क्षेत्र के झोलुंगे निवासी एक श्रमिक के भी शामिल होने की सूचना है। घटना की जानकारी मिलते ही सिक्किम पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा, जिला प्रशासन और अन्य आपदा प्रबंधन एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंच गईं। सुरंग के भीतर जहरीली गैस और ऑक्सीजन की बेहद कमी के कारण बचाव कार्य अत्यंत चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
रंगपो अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा की टीम ने सबसे पहले सुरंग में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन अंदर ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम और जहरीली गैस की मात्रा अधिक होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। बचाव अभियान में शामिल कुछ कर्मियों की तबीयत भी गैस के प्रभाव से बिगड़ गई। इसके बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम ने भी अंदर पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन सुरंग के भीतर अत्यधिक मीथेन गैस, जहरीले धुएं और अस्थिर परिस्थितियों के कारण वे भी फंसे हुए मजदूरों तक नहीं पहुंच सके।
सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल से पहुंचे बचाव दल के कुछ सदस्य भी गैस के संपर्क में आने से चक्कर खाकर बेहोश हो गए। उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। प्रशासन ने राहत अभियान को तेज करते हुए सुरंग के आसपास यातायात को नियंत्रित कर दिया है ताकि बचाव कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए। वरिष्ठ जिला अधिकारी, पुलिस और आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद हैं और स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
विशेषज्ञ अब सुरंग के भीतर वेंटिलेशन (हवा के प्रवाह) में सुधार, जहरीली गैस के स्तर को कम करने और भूस्खलन से प्रभावित हिस्से को स्थिर करने के प्रयास कर रहे हैं। इसके बाद ही बचाव दल दोबारा अंदर प्रवेश कर फंसे हुए मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास करेगा। देर शाम तक किसी भी फंसे हुए मजदूर को सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका था। प्रशासन ने अभी तक किसी के हताहत होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही सुरंग के भीतर मौजूद श्रमिकों की अंतिम संख्या जारी की है।
यह हादसा एनएचपीसी की तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना में अब तक की सबसे गंभीर दुर्घटनाओं में से एक माना जा रहा है। बचाव दल समय के खिलाफ दौड़ लगा रहे हैं, जबकि सुरंग के भीतर लगातार बनी जहरीली गैस, ऑक्सीजन की कमी और अस्थिर चट्टानों के कारण अभियान बेहद जोखिमपूर्ण बना हुआ है। अधिकारियों ने कहा है कि जैसे-जैसे बचाव अभियान आगे बढ़ेगा, स्थिति को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी।
जिलाधिकारी अनुपा तामलिंग ने बताया कि जिला प्रशासन को खबर मिलने के बाद में करीब तीन बजे इसकी जानकारी मिली। हम तुरंत वहां पहुंचे। हमने रास्ते में ही पश्चिम बंगाल एनडीआरएफ को इसकी सूचना दी। हमने वहां स्थानीय फायर और पुलिस प्रशासन के साथ बचाव अभियान चलाया है। हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। हादसे के कारण के बारे में अभी निश्चित जानकारी नहीं है। जो मजदूर वहां से निकलने उन्होंने कहा कि उन्होंने विस्फोट की आवाज सुनी है। करीब 19 लोग वहां फंसे हैं। एनएचपीसी के छह लोग वहां फंसे हैं। हमें निश्चित जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है। जब तक एनडीआरएफ की टीम नहीं बताती हम फंसे लोगों की स्थिति के बारे में कुछ नहीं बता सकते।
पुलिस अधीक्षक सोनाम डोलमा भूटिया ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता फंसे लोगों को निकालना है। उसके बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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