गंगटोक । परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों के खिलाफ देशभर में हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर एनडीए की सहयोगी पार्टी सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) ने बड़ा बयान दिया है। इंद्र हांग सुब्बा ने लोकसभा में साफ कहा कि छात्रों के आंदोलन को नकारात्मक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। इसे सरकार, सांसदों और पूरे सिस्टम के लिए एक ‘वेक अप कॉल’ बताते हुए परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक’ पर चर्चा के दौरान एसकेएम सांसद इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि देशभर में हुए छात्र आंदोलन युवाओं की बढ़ती निराशा और व्यवस्था पर घटते भरोसे का संकेत हैं। उन्होंने कहा कि यह संदेश सभी सरकारों और जनप्रतिनिधियों के लिए है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जाए।
इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जिस तरह युवा सड़कों पर उतरे हैं, उसे गलत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक यह आंदोलन सिस्टम, संसद और सरकार के लिए चेतावनी है कि परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत है ताकि छात्रों का भरोसा कायम रह सके।
बहस के बाद लोकसभा ने इस संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। विधेयक का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के मामलों में सख्त सजा का प्रावधान करना, न्यूनतम जेल की अवधि और जुर्माने की राशि बढ़ाना और मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था करना है। यह विधेयक नीट-यूजी पेपर लीक के बाद देशभर में हुए विरोध-प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में लाया गया।
इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि परीक्षा में नकल और पेपर लीक अब इक्का-दुक्का घटनाएं नहीं रह गई हैं, बल्कि यह संगठित अपराध का रूप ले चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे रैकेट आर्थिक रूप से संपन्न अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाते हैं, जबकि मेहनत करने वाले और गरीब पृष्ठभूमि के छात्र सबसे ज्यादा नुकसान उठाते हैं।
सांसद इंद्र हांग सुब्बा ने कहा कि जब कोई अभ्यर्थी अनुचित साधनों के जरिए सफल होता है और मेहनती छात्र पीछे रह जाता है, तो सिर्फ परीक्षा प्रणाली ही नहीं, बल्कि उस छात्र का भविष्य भी प्रभावित होता है। उन्होंने ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की भी मांग की।
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