‘राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस’ पर तकनीकी नवाचार का समन्वय करना

डॉ. जितेंद्र सिंह

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

11 मई को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस – ‘विज्ञान टेक’, भारत द्वारा 1998 में किए गए सफल पोखरण-II परमाणु परीक्षणों के जरिए प्राप्‍त ऐतिहासिक तकनीकी उपलब्धि का कीर्तिगान करता है। यह अवसर भारत की विकास यात्रा को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वैज्ञानिक नवाचार, तकनीकी प्रगति तथा विज्ञान, समाज और उद्योग के समन्वय के प्रति राष्ट्र की निरंतर प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

पिछले एक दशक में, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का तकनीकी इकोसिस्‍टम  अभूतपूर्व विकास का साक्षी रहा है, जो त्‍वरित नवाचार, विस्तारित डिजिटल अवसंरचना तथा उभरते क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति से परिलक्षित होता है। आत्मनिर्भरता तथा वैज्ञानिक नवाचारों को वास्तविक दुनिया में प्रभावी रूप से लागू करने पर विशेष बल दिया गया है। क्वांटम संचार, अंतरिक्ष, जैव-प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा तथा जलवायु के प्रति लचीली प्रणालियों जैसे अग्रणी प्रौद्योगिकी-आधारित क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। जैव-निर्माण विकसित भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जो जैविक प्रणालियों के माध्यम से उच्च-मूल्य वाले जैव-उत्पादों, टीकों, ईंधनों और सामग्रियों के उत्पादन द्वारा सतत नवाचार, स्वास्थ्य सुरक्षा तथा सशक्त जैव-अर्थव्यवस्था को सक्षम बनाती है। चंद्रयान-3 मिशन में भारत की सफलता तथा हाल की उपलब्धियाँ, जैसे कलपक्कम स्थित स्वदेशी प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में क्रिटिकलिटी प्राप्त करना, रणनीतिक क्षेत्रों में देश की प्रगति और दीर्घकालिक तकनीकी आत्मनिर्भरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और अधिक रेखांकित करती हैं।

यह प्रगति विभिन्न प्रमुख राष्ट्रीय मेट्रिक्स में भी परिलक्षित होती है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन द्वारा जारी वैश्विक नवाचार सूचकांक में भारत ने अपनी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार किया है और वर्ष 2015 में 81वें स्थान से बढ़कर 2025 में 38वें स्थान पर पहुँच गया है। देश में स्वीकृत पेटेंटों की संख्या भी 2014-15 में कुछ हजार से बढ़कर 2025 में लगभग 1.5 लाख तक पहुँच गई है। भारत का स्टार्टअप इकोसिस्‍टम भी तेज़ी से विस्तारित हुआ है। विभिन्न क्षेत्रों में उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी)  द्वारा मान्यता प्राप्त 1.5 लाख से अधिक स्टार्टअप कार्यरत हैं, जिनमें लगभग पंद्रह हजार स्टार्टअप कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स तथा एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग जैसे प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। यह परिवर्तन नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जहाँ गैर-जीवाश्म स्रोतों से ऊर्जा क्षमता 250 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। साथ ही, देश की जैव-अर्थव्यवस्था ने भी एक दशक में 10 बिलियन डॉलर से बढ़कर 195 बिलियन डॉलर तक की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।

पिछले एक दशक में सरकार द्वारा लागू किए गए नीतिगत सुधारों ने इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इनमें स्टार्टअप और इनक्यूबेशन इकोसिस्‍टम का त्‍वरित विस्तार, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को निजी कंपनियों के लिए खोलना, तथा अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ), बायोई3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) नीति तथा हाल ही में प्रारंभ किए गए 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान, विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष जैसे सक्षम ढाँचों की स्थापना शामिल है। इन पहलों ने भारत की नवाचार संरचना को सुदृढ़ किया है और वैज्ञानिक उपलब्धियों को सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव में परिवर्तित करने पर फोकस को और मजबूत किया है। अब विज्ञान प्रयोगशालाओं से बाज़ारों तक और विचारों से वास्तविक प्रभाव तक पहुँच रहा है।

सरकार सक्रिय नीतियों, पुराने विनियमों को हटाने तथा भारतीय नवोन्मेषकों के लिए नैतिक और समान अवसर वाला वातावरण तैयार करके आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। सरकार अब केवल प्रमुख वित्तपोषक की भूमिका तक सीमित न रहकर, एक प्रमुख सक्षमकर्ता की भूमिका भी निभा रही है। भारत में अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को रणनीतिक दिशा प्रदान करने वाले केंद्रीय शीर्ष निकाय के रूप में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) की स्थापना की गई है। इसका उद्देश्य भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था तथा नवाचार के क्षेत्र में ग्‍लोबल लीडर के रूप में स्थापित करना है। इसका वृहद उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह यात्रा स्वदेशी बौद्धिक संपदा, नैतिक ढाँचों तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लिए ‘सम्पूर्ण समाज’ की प्रतिबद्धता हेतु ‘सम्पूर्ण सरकार’ दृष्टिकोण के माध्यम से संचालित हो।

‘विज्ञान टेक’ इस यात्रा को दर्शाता है, जिसमें विज्ञान आधारभूत केंद्र के रूप में है, प्रौद्योगिकी सक्षमकर्ता के रूप में है तथा नवाचार उसका परिणाम है। बीआरआईसी-राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (एनआईआई) में 11 मई 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय प्रदर्शनी में भारत सरकार के 14 मंत्रालयों एवं विभागों के अंतर्गत आने वाले प्रमुख राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों और प्रयोगशालाओं द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित 350 से अधिक डीप-टेक प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया जाएगा। ये स्वदेशी प्रौद्योगिकियाँ विभिन्न प्रमुख विषयगत क्षेत्रों को समाहित करती हैं, जिनमें बायोफार्मा एवं स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी, जैव-औद्योगिक एवं हरित रसायन, अंतरिक्ष एवं भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, जलवायु एवं कृषि-खाद्य प्रौद्योगिकी, डीप-टेक सामग्री एवं उन्नत अभियांत्रिकी प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर एवं ऊर्जा, तथा गहरे समुद्र एवं वायुमंडलीय प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं। इनमें से अनेक प्रौद्योगिकियाँ पहले ही लाइसेंस प्राप्त कर चुकी हैं या व्यावसायिक रूप से उपयोग में लाई जा चुकी हैं, जबकि अन्य शीघ्र ही लाइसेंसिंग और व्यापक उपयोग हेतु उपलब्ध होंगी।

इन सभी नवाचारों में एक समान सूत्र यह है कि अनुसंधान अब अलग-थलग कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर एकीकृत एवं पारिस्थितिकी-तंत्र आधारित दृष्टिकोण की ओर अग्रसर हो रहा है। सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान अब स्टार्टअप्स और उद्योगों के साथ निकट सहयोग में कार्य कर रहे हैं, ताकि प्रौद्योगिकियाँ प्रयोगशालाओं से निकल कर शीघ्रता से बाज़ार तक पहुँच सकें।

भारत के तकनीकी विकास के अगले चरण के लिए अनुसंधान कार्यक्रमों के अवधारणा-निर्माण की प्रक्रिया से ही शिक्षा जगत, उद्योग जगत, स्टार्टअप्स और सरकार के बीच और अधिक गहन समन्वय की आवश्यकता होगी। उद्योग और अकादमिक संस्थानों के बीच मजबूत साझेदारी से अनुसंधान को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, बाज़ार की आवश्यकताओं और सामाजिक चुनौतियों के अनुरूप बेहतर ढंग से जोड़ा जा सकेगा। साथ ही, क्रांतिकारी नवाचार और वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए मौलिक अनुसंधान को भी निरंतर प्रोत्साहित करना आवश्यक होगा। राष्ट्रीय संस्थानों और प्रयोगशालाओं को भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, उन्नत सामग्री, क्वांटम प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अन्वेषण तथा चिकित्सा प्रौद्योगिकी जैसे अग्रणी क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों से निपटने हेतु अधिक सहयोगपूर्ण और मिशन-आधारित तरीके से कार्य करना होगा।

जैसे-जैसे विज्ञान और प्रौद्योगिकी अभूतपूर्व गति से विकसित हो रहे हैं, नियामक ढाँचों का भी अधिक अनुकूलनीय, सुव्यवस्थित और नवाचार-हितैषी बनाना आवश्यक है। कोशिका एवं जीन थेरेपी, मोनोक्लोनल बायोलॉजिक्स, सिंथेटिक बायोलॉजी तथा स्वायत्त प्रणालियों जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए ऐसे चुस्त और साक्ष्य-आधारित नियामक ढाँचे आवश्यक हैं, जो नवाचार, सुरक्षा और नैतिकता के बीच संतुलन स्थापित कर सकें। रेगुलेटरी सैंडबॉक्स जैसे गतिशील तंत्र जिम्मेदार नवाचार को तेज़ी से आगे बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। राज्यों की अधिक भागीदारी (जैसे बायोई3 प्रकोष्‍ठ) तथा विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 शहरों में क्षेत्रीय नवाचार इकोसिस्‍टम, वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के अधिक विकेन्द्रीकृत एवं बॉटम-अप दृष्टिकोण (यानी निचले स्‍तर से ऊपर तक के दृष्टिकोण) को बढ़ावा दे सकते हैं। यह दृष्टिकोण क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और चुनौतियों के अनुरूप होगा तथा यह सुनिश्चित करेगा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी पूरे देश में जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक शक्तिशाली साधन के रूप में कार्य करें।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी शक्ति, आर्थिक वृद्धि को गति देने, शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने, उत्पादकता बढ़ाने तथा समावेशी विकास को प्रोत्साहित करने में सहायता प्रदान करते हुए विकसित भारत के विज़न को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और राष्‍ट्रीय क्वांटम मिशन जैसी सरकारी पहलें, साथ ही बायोमैन्युफैक्चरिंग, प्रिसीजन बायोथेराप्यूटिक्स तथा कृषि एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई)-आधारित समाधानों में हो रही प्रगति यह दर्शाती हैं कि भारत उभरती प्रौद्योगिकियों में नवाचार और नेतृत्व को मजबूत करने पर रणनीतिक रूप से ध्‍यान केंद्रित कर रहा है। भारत अब मुख्यतः प्रौद्योगिकी के उपभोक्ता से आगे बढ़कर वैश्विक नवाचार केंद्र के रूप में परिवर्तित हो रहा है।

जैसे-जैसे भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार आर्थिक विकास को गति देने, रणनीतिक आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने, सामाजिक परिवर्तन को प्रेरित करने तथा सतत भविष्य सुनिश्चित करने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाना जारी रखेंगे।

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