गंगटोक : सिक्किम कला एवं साहित्य महोत्सव 2026 के अंतिम दिन की शुरुआत शुक्रवार की सुबह रिज पार्क में राजस्थान की पारंपरिक लोकसंगीत प्रस्तुति के साथ हुई। ‘खम्मा घणी सिक्किम’ शीर्षक से आयोजित इस विशेष प्रस्तुति में मागदा खान एवं उनके समूह ने राजस्थानी लोकसंगीत की समृद्ध परंपरा से दर्शकों को रूबरू कराया। इसके साथ ही कविता, नेपाली साहित्य, हिमालयी सांस्कृतिक पहचान, फिल्म निर्माण और चित्रकला जैसे विविध विषयों पर आयोजित संवाद सत्रों ने महोत्सव के अंतिम दिन को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष बना दिया।
राजस्थान के जैसलमेर और बाड़मेर के मरुस्थलीय क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाले मांगणियार समुदाय के पारंपरिक लोक कलाकार मागदा खान एवं उनके समूह ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से राजस्थान की लोकधुनों और संगीत विरासत को जीवंत किया। उनकी प्रस्तुति ने उत्साह और सांस्कृतिक विविधता का रंग भर दिया।
इसके बाद ‘इकोज ऑफ वर्स’ शीर्षक से एक साहित्यिक संवाद आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय कवि एवं कला समीक्षक रंजीत होसकोटे ने लेखक गुरु टी. लद्दाखी के साथ बातचीत की। इस सत्र में कविता की साहित्यिक महत्ता, मानवीय अनुभवों और भावनाओं को अभिव्यक्त करने की उसकी क्षमता तथा सांस्कृतिक स्मृतियों को संरक्षित रखने में उसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।
रिज पार्क में सुबह का अंतिम सत्र ‘द नेपाली इमेजिनेशन : बिटवीन माउंटेन्स एंड मेमोरी’ विषय पर केंद्रित रहा। इसमें लेखक शंकर देव ढकाल, लेखक प्रज्वल पराजुली और कवयित्री सुधा एम राई ने कवि प्रवीन खालिंग के साथ नेपाली भाषा, स्थानीय साहित्य और हिमालयी समाज की सांस्कृतिक पहचान पर विचार साझा किए।
चर्चा के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय कहानियों, लोककथाओं, इतिहास और आम लोगों के जीवनानुभवों को वैश्विक पाठकों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने मातृभाषा के संरक्षण के साथ अपनी भाषा में पढऩे, लिखने और विचार करने की संस्कृति विकसित करने पर बल दिया। वक्ताओं ने स्थानीय साहित्य को व्यापक पहचान दिलाने के लिए अनुवाद और डिजिटल मंचों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने साहित्यिक रचनाओं में महिलाओं के अनुभवों, संघर्षों और जीवन की वास्तविकताओं को पर्याप्त स्थान देने की आवश्यकता भी रेखांकित की।
युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने नियमित रूप से पढ़ने और लिखने की आदत विकसित करने तथा अपने अनुभवों, भावनाओं और विचारों को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय भाषा और साहित्य किसी भी समाज की सांस्कृतिक स्मृति एवं पहचान के महत्वपूर्ण आधार हैं।
इसी दौरान व्हाइट मेमोरियल हॉल में ‘स्टोरीज फ्रॉम द ड्रैगन किंगडम’ शीर्षक से एक अन्य संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें फिल्म निर्माता चार्मी छेड़ा और भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी की पर्यटन निदेशक कैरिसा निमाह ने पत्रकार एवं लेखक पेमा वांगचुक दोरजी के साथ बातचीत की।
व्हाइट मेमोरियल हॉल में ही ‘डूडल्स एंड वर्ड्स’ विषय पर एक अन्य रोचक संवाद भी आयोजित किया गया। इसमें कॉमिक कलाकार पंकज थापा, सामाजिक कार्यकर्ता रचिता तनेजा और लेखक उल्जन दत्ता ने पत्रकार एवं लेखिका अनुराधा शर्मा के साथ बातचीत की। साहित्य, चित्रकला और रचनात्मक अभिव्यक्ति के विभिन्न स्वरूपों को एक मंच पर लाने वाले इन सत्रों ने महोत्सव के अंतिम दिन को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया।
No Comments: