सोरेंग : सोरेंग जिला, खास कर सोरेंग नगर पंचायत में ट्रैफिक कम करने, सड़क सुरक्षा और सड़क बुनियादी ढांचा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए आज स्थानीय डीआईसी में जिला कलेक्टर और अध्यक्ष धीरज सुबेदी की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की एक संयुक्त बैठक बुलाई गई।
बैठक की शुरुआत में अध्यक्ष ने मौजूदा सड़क बुनियादी सुविधा पर बढ़ते दबाव पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसके कारण सोरेंग शहर और उसके आसपास पार्किंग की चुनौतियां और ट्रैफिक की भीड़ बढ़ती जा रही है। ऐसे में, इस क्षेत्र के एक अर्ध-शहरी ‘नगर पंचायत’ में बदलने की बात भी कही गई, जिसके लिए व्यवस्थित योजना और समन्वित हस्तक्षेपों की आवश्यकता है।
बैठक में, ट्रैफिक की स्थिति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया, जिसमें सोरेंग शहर में आने वाली मुख्य सड़कों से भीड़ कम करने पर विशेष जोर दिया गया। इस पर सड़कों की जगह पर अतिक्रमण के व्यवस्थित मूल्यांकन के साथ ही वाहनों की सुचारू आवाजाही के लिए सड़कें साफ रखने पर चर्चा हुई। इस संबंध में, प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और उपयुक्त अल्पकालिक व दीर्घकालिक सुधारात्मक उपायों के लिए 5 मई को एक व्यापक सर्वेक्षण किये जाने का निर्णय लिया गया। जिला कलेक्टर ने बताया कि इस सर्वेक्षण टीम में एडीसी, एएसपी, एडीसी (विकास), डीएफओ, सड़क विभाग के एई, डिप्टी आरटीओ और बाजार अधिकारी के साथ नगर पंचायत के सदस्य भी शामिल होंगे।
इसके अलावा, भीड़ को प्रभावी रूप से कम करने और सुचारू ट्रैफिक आवाजाही सुनिश्चित करने हेतु आवश्यकता होने पर शहरी विकास विभाग को भवन के नक्शे जमा एवं प्रस्तुत करने के प्रावधान को एक नियामक उपाय के रूप में माना जा सकने पर भी विचार-विमर्श किया गया। साथ ही, बैठक में भीड़ कम करने की तत्काल और दीर्घकालिक रणनीतियों पर चर्चा हुई।
बैठक में, सार्वजनिक परिवहन और आवागमन में सुधार के लिए एसपी नकुल प्रधान ने बताया कि कुछ नियामक उपाय किए जा रहे हैं। इनमें भीड़ कम करने के लिए कामकाजी दिनों में सुबह 9 बजे से 11 बजे के बीच भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाना शामिल है।
बैठक में सड़क सुरक्षा की पूरी तरह से समीक्षा करते हुए सभी संबंधित विभागों के बीच तालमेल वाले दृष्टिकोण पर जोर दिया गया। जरूरी सड़क सुरक्षा उपकरणों की जरूरतों की पहचान करते हुए उन्हें लगाने के लिए प्रस्तावित किया गया। साथ ही, जलभराव रोकने और आगामी मानसून के दौरान सुरक्षा हेतु उचित जल निकासी व्यवस्था बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया गया।
सड़क के किनारे निर्माण सामग्री छोड़े जाने से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई, क्योंकि इनसे ट्रैफिक के प्रवाह और सुरक्षा, दोनों को खतरा होता है। पुलिस विभाग ने बताया कि ऐसे मुद्दों को नियमित बीट और मोबाइल गश्त के ज़रिए हल किया जा रहा है।
बुनियादी ढांचे के मामले में, सड़कों की मौजूदा स्थिति और जल निकासी तथा रखरखाव जैसी संबंधित चुनौतियों पर चर्चा हुई। सुचारू ट्रैफिक प्रवाह और सड़क सुरक्षा के लिए टिकाऊ सड़क बुनियादी ढांचे के विकास को सुनिश्चित करने हेतु विभागों के बीच अधिक तालमेल पर जोर दिया गया। वहीं, ट्रैफिक प्रबंधन में तकनीक के इस्तेमाल की भी समीक्षा की गई और यह बताया गया कि इलाके में निगरानी हेतु फिलहाल 23 सीसीटीवी कैमरे चालू हैं। साथ ही, भीड़ की समस्या को हल करने में जन जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को महत्वपूर्ण घटक के रूप में पहचाना गया।
बैठक में मौजूद सोरेंग टैक्सी ड्राइवर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने अपनी शिकायतें साझा कीं और सुझाव दिए। इस दौरान, बैठक में एडीसी डीआर बिष्ट, एसडीपीओ छेवांग भूटिया, सीएमओ डॉ. स्मृति राई, सड़क एवं पुल एसई तारा सुब्बा, डीई नयन बराइली, डीएफओ पेगीला वेनचुंगपा, डीपीओ कुमार सुब्बा, डीडी (शिक्षा) छेवांग शेरपा, डिप्टी आरटीओ बसंत छेत्री, एलआरडीएम आरओ एलएन तिवारी के साथ कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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