गंगटोक : सिक्किम सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा गंगटोक स्थित मनन भवन में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सोमनाथ मंदिर के आध्यात्मिक, सभ्यतागत और राष्ट्रीय महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। यह आयोजन देशव्यापी कार्यक्रमों की श्रृंखला का हिस्सा है, जिसमें सोमनाथ से जुड़ी हजार वर्षों की अटूट आस्था का स्मरण किया जा रहा है। साथ ही वर्ष 1026 में मंदिर पर हुए पहले हमले के एक हजार वर्ष तथा स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1951 में इसके पुनः उद्घाटन के 75 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर को भी चिह्नित किया गया।
कार्यक्रम में संस्कृति विभाग की अध्यक्ष भीम कुमारी शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और उन्हें भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल इतिहास का स्मरण कराते हैं, बल्कि समाज को अपनी विरासत, कर्तव्य और राष्ट्रीय चेतना से भी जोड़ते हैं। कार्यक्रम में अधिकारियों, कलाकारों, विद्यार्थियों एवं आमंत्रित अतिथियों ने भाग लेकर सांस्कृतिक निरंतरता और दृढ़ता के प्रतीक के रूप में सोमनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद सहायक अधिकारी एवं नोडल अधिकारी छिरिंग लीज़ुम ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए आयोजन के महत्व और संदेश पर प्रकाश डाला।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के अंतर्गत सुश्री बनिता एवं उनके समूह द्वारा गणेश वंदना तथा सुश्री डेने एवं समूह द्वारा शिव तांडव नृत्य प्रस्तुत किया गया। वहीं, लक्ष्मण काफ्ले, दीप राज राई, प्रणेश अधिकारी, सुश्री प्रणीता एवं चेतन द्वारा शिव भजन प्रस्तुत किए गए। इसके अतिरिक्त गणेश ढुंगेल एवं उनकी टीम द्वारा समूह भजन ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। संस्कृति विभाग के विशेष कर्तव्य अधिकारी भवानी घिमिरे ने अपने विशेष व्याख्यान में इस पर्व के ऐतिहासिक संदर्भों को प्रस्तुत करते हुए इसे राष्ट्रीय पहचान को सुदृढ़ करने और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान बढ़ाने का माध्यम बताया। राज्य केंद्रीय पुस्तकालय की पुस्तकालय सहायक सुषमा छेत्री द्वारा प्रस्तुत कहानी सत्र ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक आयाम प्रदान किया।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में सुश्री रेनुका द्वारा कथक नृत्य तथा लेप्चा, भूटिया और नेपाली समुदायों की एकता को दर्शाता एकता नृत्य शामिल रहा, जिसने विविधता में एकता का संदेश देते हुए राज्य की सांस्कृतिक समरसता को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (श्री सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं) के नेतृत्व में सोमनाथ के पुनरुत्थान के प्रयासों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें विरासत संरक्षण, आधारभूत संरचना विकास, सुशासन, स्थिरता एवं समावेशी पहलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अंत में कार्यक्रम समन्वयक नेहा तमांग द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया, जबकि कार्यक्रम का संचालन यांगजुम लेप्चा ने किया। इस अवसर पर संस्कृति विभाग के मुख्य अभियंता रिम्प दोरजी लेप्चा, विशेष सचिव छिरिंग यांगदोन शार्टसो सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी तथा गंगटोक के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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