गंगटोक : सिक्किम अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल 2026 के दूसरे दिन आज स्थानीय चिंतन भवन में सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, कोलकाता द्वारा ‘फिल्म संपादन के माध्यम से कहानी कहने’ पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। इस सत्र में संपादक और फिल्म निर्माता शंखजीत बिश्वास, सिनेमैटोग्राफर इंद्रजीत मुखर्जी और केशव मन्ना शामिल हुए।
गौरतलब है कि सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, कोलकाता एक प्रमुख फिल्म संस्थान है जो फिल्म, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया क्षेत्रों में एमएफए प्रोग्राम प्रदान करता है। यहां निर्देशन, सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, साउंड, लेखन और प्रोडक्शन में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
सत्र के दौरान, शंखजीत बिश्वास ने सिनेमा में कहानी कहने के महत्व को दर्शकों को भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक रूप से जोड़ने वाले एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में रेखांकित किया।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिनेमा दर्शकों को उनकी निजी समस्याओं से ऊपर उठने और नकारात्मकता व भावनात्मक तनाव के दौर से बाहर निकलने में सक्षम बनाता है। कहानी कहने के माध्यम से, फिल्में मुक्ति का एहसास कराती हैं, जिससे व्यक्तियों को जटिल भावनाओं को समझने और जीवन के प्रति एक नया दृष्टिकोण प्राप्त करने में मदद मिलती है।
बिश्वास ने आगे इस बात पर भी जोर दिया कि फिल्में, खास कर वृत्तचित्र, ज्ञान और जागरुकता के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विविध मानवीय अनुभवों और वास्तविकताओं को प्रस्तुत करके, सिनेमा में कहानी कहने की कला मनोविज्ञान, समाज और मानवीय व्यवहार की गहरी समझ विकसित करने में योगदान देती है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने विक्टर एरिस द्वारा निर्देशित ‘लाइफलाइन’ नामक फिल्म पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें उन्होंने फिल्म के मूल तत्व पर प्रकाश डाला और उसका विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने इस लघु फिल्म के दृश्य और ध्वनि पहलुओं को भी रेखांकित किया। कार्यशाला में दो लघु फिल्मों, ऋषि चंदना की ‘टुंग्रस एंड हिज पेट चिकन फ्रॉम हेल’ और विक्टर एरिस की ‘लाइफलाइन’, की स्क्रीनिंग भी की गई, जिसके बाद एक संवादात्मक सत्र आयोजित हुआ।
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