सहकारिता संस्थाओं के भीतर शासन-प्रशासन में होगा सुधार : अरुण उप्रेती

'सिक्किम राज्य सहकारिता नीति 2026' का हुआ शुभारंभ

पाकिम : सिक्किम सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित ‘सिक्किम राज्य सहकारिता नीति 2026’ का आज यहां शुभारंभ हुआ। इसमें राज्य के ग्रामीण विकास एवं सहकारिता मंत्री अरुण कुमार उप्रेती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ, सहकारिता अध्यक्ष विद्या विश्वकर्मा, सहकारिता सलाहकार श्याम प्रधान, सहकारिता रजिस्ट्रार एवं अतिरिक्त रजिस्ट्रार, शीर्ष संस्थाओं के प्रबंध निदेशक और अन्य अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।

इस अवसर पर मंत्री Arun Upreti ने इस बात पर प्रकाश डाला कि राज्य सहकारिता नीति का शुभारंभ राज्य के प्रगतिशील सामाजिक-आर्थिक ढांचे की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि यह नीति सहकारिता संस्थाओं के भीतर शासन-प्रशासन में सुधार, वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और पेशेवर रवैये को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। यह क्षमता निर्माण, पारदर्शिता, आधुनिक तकनीक को अपनाने और सभी स्तरों पर सदस्यों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान देगी। ऐसे में, ये उपाय सहकारिता संस्थाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समुदाय को सशक्त करने में सहायक होंगे। साथ ही, सहकारिता क्षेत्र में विकास और बदलाव के महत्व को रेखांकित करते हुए मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि समावेशी विकास को गति देने के लिए संस्थाओं का मजबूत, पारदर्शी और जन-केंद्रित होना अत्यंत आवश्यक है।

वहीं, प्रधान सहकारिता सचिव जबी थापा ने बताया कि भारत सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय सहकारिता नीति’ लागू किए जाने के बाद उनके विभाग ने भी बहुत कम समय के भीतर अपनी ‘राज्य सहकारिता नीति’ तैयार करने में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह नीति केवल एक दस्तावेज मात्र नहीं, बल्कि यह एक ऐसा ढांचा है जिसका उद्देश्य “सहकार से समृद्धि” के स्वप्न को साकार करना है, और साथ ही “विकसित भारत एट 2047” के लक्ष्य में भी अपना योगदान देना है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि इस नई नीति के तहत किए गए सामूहिक प्रयास राज्य के सहकारिता क्षेत्र में विकास के एक नए युग का सूत्रपात करेंगे।

इसके अलावा, संयुक्त सहकारिता रजिस्ट्रार रोहित रसाइली ने भी “सिक्किम राज्य सहकारिता नीति 2026” पर अपनी एक प्रस्तुति में ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सहकारिता संस्थाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि यह नीति ऐसी मजबूत, लचीली और समुदाय-उन्मुख संस्थाओं के निर्माण पर केंद्रित है, जो आम लोगों तक वास्तविक लाभ पहुंचाने में सक्षम हों। उन्होंने आगे कहा कि इस नीति को 19 उद्देश्यों के तहत तैयार किया गया है, जिन्हें छह मुख्य स्तंभों में बांटा गया है। इन स्तंभों का लक्ष्य शासन, क्षमता निर्माण, प्रदर्शन और संस्थागत मजबूती जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है।

कार्यक्रम के दौरान ‘सिक्किम राज्य सहकारी नीति 2026’, ‘सहकारी समितियों के अंतरराष्ट्रीय वर्ष 2025’ पर आधारित एक विभागीय पत्रिका और सहकारिता विभाग के मासिक डिजिटल ई-न्यूजलेटर का भी विमोचन किया गया। साथ ही, गेजिंग जिला सहकारी कार्यालय द्वारा विकसित ‘प्राथमिक सहकारी समितियां निरीक्षण ऐप’ का एक प्रदर्शन भी प्रस्तुत किया गया।

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